संत श्रेष्ठ ज्ञानेश्वर महाराज – 12 अगस्त जयंती विशेष

 – डॉ० आशीष पुराणिक 15 वर्ष का छोटा बालक पैठण धर्मपीठ को नम्रता से प्रश्न करता है, “आपके अन्नमय शरीर से मेरे अन्नमय शरीर को…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-14 (करण-उपकरण-विवेक)

 – वासुदेव प्रजापति संस्कृत शब्द करण से हम भली-भाँति परिचित हैं। करण के आगे उप उपसर्ग लगने से उपकरण शब्द बनता है। करण का अर्थ…

सारे जगत में स्वयं को और स्वयं में सारे जगत को देखने की दृष्टि भारत की है – सरसंघचालक मोहन भागवत

श्रीराम मंदिर निर्माण कार्य शुभारंभ कार्यक्रम में पू. सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का उद्बोधन श्रद्धेय महंत नृत्यगोपाल जी महाराज सहित उपस्थित सभी संत चरण,…

Carefully crafted policy by comprehending The Past Experiences, Present Challenges and Future Needs

Press Statement by Shri D. Ramakrishna Rao, All India President, Vidya Bharati Akhil Bharatiya Shiksha Sansthan After consultation for six long years with academia, intelligentsia,…

अतीत के अनुभव, वर्तमान की चुनौतियों तथा भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर गढ़ी गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति : डी. रामकृष्ण राव

विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के अखिल भारतीय अध्यक्ष श्री डी० रामकृष्ण राव जी का प्रेस वक्तव्य छ: वर्ष तक शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों, विचारकों, शैक्षिक…

बच्चों को सुनाएँ ‘कारगिल के हीरो’ की कहानियां

लेख  – विजय नड्डा   युद्ध में प्रत्येक सैनिक हीरो होता है। युद्ध की जीत में सामान्य समाज से लेकर राजनीतिक, प्रशासनिक व सैन्य नेतृत्व…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-13 (करणों की सक्रियता)

 – वासुदेव प्रजापति ज्ञानार्जन के सभी करण जन्म से ही हमें मिल तो जाते हैं, परन्तु जन्म से ये सभी करण सक्रिय नहीं होते, अक्रिय…

EDUCATION AND SWADESHI MODEL

 – G R Jagadeesh Any country should have its own aim and vision in order to achieve progress. This contains both ideological and realistic dimensions…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-12 (करणों का विकास)

-वासुदेव प्रजापति ज्ञानार्जन के करणों में हमने बहि:करण एवं अन्त:करण को जाना। बहि:करण में कर्मेन्द्रियों व ज्ञानेन्द्रियों के कार्यों को समझा और अन्त:करण में मन,…

Relevance of the Bharatiya way of life in the present context-2

 – Vasudev Prjapati  – Translated in English by Avnish Bhatnagar In the Bharatiya thought process, life is believed to be one, single, continuing, integral, which…