भारत में वैचारिक प्रदूषण

 – दिलीप बेतकेकर पूरी दुनिया प्रदूषण से ग्रस्त है। प्रदूषण को रोकने के लिए विभिन्न प्रयास चल रहे हैं। विश्वस्तर से लेकर छोटे-छोटे शहरों में…

स्वभाषा अर्थात् भारतीय भाषाओं के प्रति अपना स्वाभिमान जगाएँ

                                                                                                                        – डॉ. विकास दवे मालवी बोली में एक प्रसिद्ध कहावत है जिसका भाव है- “जो व्यक्ति अपनी माँ को माँ नहीं कह सकता वह…

छात्र-छात्राओं के विकास में शारीरिक शिक्षा की भूमिका

– शिव कुमार शर्मा ‘शरीरमाद्य खलु धर्मसाधनम्’ हमारी परम्परा में एक महत्वपूर्ण उक्ति है। धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष रूपी पुरुषार्थ की प्राप्ति का साधन…

Types of students, Ethics before education, Curriculum of teaching and Teacher student relationship according to Bharatiya vangmaya (Indian literature)

 – Dr KK Aggarwal The Bhagavad Gita (7.16) has described four types of devotees. “catur-vidhabhajante mam janahsukrtino ‘rjuna artojijnasurartharthi jnani ca bharatarsabha” चतुर्विधाभजन्तेमांजना: सुकृतिनोऽर्जुन ।…

मातृभाषा के बिना मौलिक विचारों का सृजन सम्भव नहीं

– देशराज शर्मा जन्म लेने के बाद मानव जो प्रथम भाषा सीखता है उसे उसकी मातृभाषा कहते है। मातृभाषा, किसी भी व्यक्ति की सामाजिक एवं…

कब आयेंगे शिक्षा के अच्छे दिन?

 – अवनीश भटनागर प्रख्यात रूसी साहित्यकार लियो टॉल्सटॉय (1828-1910) ने लिखा है, “शिक्षाशास्त्र बहुत कुछ आधुनिक चिकित्साशास्त्र जैसा है, जो हमें बताता है कि प्रकृति…

क्षमता का विकास कैसे करें?

 – अवनीश भटनागर क्षमता अर्थात् किसी-किसी में जन्मजात होती है कोई-कोई विकसित करने का प्रयास करता है। उनमें भी कोई-कोई सफल होता है। किसी अन्य…

पू. सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत द्वारा शिक्षा पर प्रश्नोत्तर का सम्पादित अंश, भविष्य का भारत – संघ का दृष्टिकोण, (तृतीय दिवस), 20 सितंबर 2018, दिल्ली

  प्रश्न – शिक्षा में भारतीय मूल्य। शिक्षा में परम्परा और आधुनिकता का समन्वय वेद, रामायण, महाभारत आदि का शिक्षा में समावेश, सहशिक्षा आदि विषयों…

शिक्षक राष्ट्र निर्माता बनें !

 – वासुदेव प्रजापति आज शिक्षक से राष्ट्र निर्माता बनने की अपेक्षा करना भले ही आतिश्योक्त्तिपूर्ण लगता होगा, किन्तु वास्तविकता यही है कि भारत राष्ट्र को…

शिक्षक के प्रेरणा स्त्रोत राष्ट्र निर्माता शिक्षक

 – वासुदेव प्रजापति एक स्वाभाविक प्रश्न खड़ा होता है कि इस अर्थ प्रधान युग में शिक्षक को राष्ट्र निर्माता की भूमिका निभाने की प्रेरणा कहाँ…