– वासुदेव प्रजापति आज देश के गाँव-गाँव तथा गली-गली में विद्यालय खुलते जा रहे हैं। क्यों? क्योंकि हमने शिक्षा को व्यवसाय बना लिया है।…
Category: लेख
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-20 (अध्यापन)
– वासुदेव प्रजापति अध्यापन ( पढ़ाना ) अध्ययन अर्थात् पढ़ना और अध्यापन अर्थात् पढ़ाना। पढ़ना और पढ़ाना दोनों एक ही क्रिया के दो पद हैं।…
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ : व्यक्ति, समाज और सृष्टि तक को एक सूत्र में देखने वाली दृष्टि
– हितेश शंकर संगठन का अंकुर व्यक्ति की आकांक्षा से फूटता है। ज्यादातर संगठन किसी एक विषय, किसी एक या परस्पर जुड़े क्षेत्रों में, एक…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-19 (अध्ययन)
– वासुदेव प्रजापति अध्ययन (पढ़ना) अध्ययन का अर्थ है, “पढ़ना”। पढ़ना और पढ़ाना या अध्ययन और अध्यापन एक ही क्रिया के दो स्वरूप हैं। हम…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-18 (आचार्य और छात्र सम्बन्ध)
– वासुदेव प्रजापति आज के समय में सामान्य व्यक्ति भी यह कहता है कि हमारे जमाने में आचार्य-छात्र सम्बन्ध जितने मधुर थे, वैसे आज नहीं…
Bharatiya perspective of education: Deen Dayal Upadhyay
– Dr Kuldeep Mehandiratta Bhartiya perspective of education, ‘Sa Vidya Ya Vimuktya’, denotes education as the way which liberates human beings. Pandit Deen Dayal…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-17 (आदर्श आचार्य)
– वासुदेव प्रजापति भारतीय समाज में आचार्य का स्थान अत्यन्त आदरणीय, पूजनीय एवं श्रेष्ठ माना गया है। सभी प्रकार के सत्तावान, बलवान और धनवान व्यक्तियों…
विश्व पटल पर हिन्दी के बढ़ते चरण
– प्रोफेसर बाबूराम किसी भी राष्ट्र की अस्मिता उसकी भाषा से होती है। भाषा संस्कृति को प्रभावित करती है और संस्कृति व दर्शन से प्रभावित…
विश्व बंधुत्व दिवस – 11 सितम्बर
निवेदिता (उपाध्यक्ष), विवेकानन्द केन्द्र, कन्याकुमारी मूल अंग्रेजी – अनुवाद प्रा. सुधीर गर्ग, सोनीपत इस वर्ष 11 सितम्बर का दिन एक अति-विशेष दिन है क्योंकि 50…
विवेकानन्द शिला स्मारक – एक अद्भुत राष्ट्रीय स्मारक
अलकागौरी, जीवनव्रती, विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी आज से 50 वर्ष पूर्व इसी महीने में एक अद्भुत स्मारक का राष्ट्रार्पण हो रहा था। एक ऐसा स्मारक…