भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-16 (आदर्श विद्यार्थी)

 – वासुदेव प्रजापति “विद्यार्थी” शब्द विद्या और अर्थी इन दो शब्दों से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है – विद्या(ज्ञान) प्राप्त करने वाला। अर्थात् जो…

भारत में शिक्षक गुणवत्ता

किसी भी देश की प्रगति वहां की शिक्षा के ऊपर निर्भर करती है और शिक्षा की गुणवत्ता शिक्षक की गुणवत्ता पर आधारित है भारत विश्व…

शिक्षक दिवस : समाज तथा शिक्षक के दायित्व स्मरण का उत्सव

 – डॉ कुलदीप मेहंदीरत्ता भारतीय विचार और संस्कृति में आदर्श शिक्षक के स्वरुप की कल्पना की गई है। जगद्गुरु की उपाधि धारण करने वाले देश…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-15 (ज्ञान प्राप्त करने की योग्यता)

 – वासुदेव प्रजापति अब तक हमने ज्ञानार्जन के करण, करणों का विकास, करणों की सक्रियता, ज्ञानार्जन प्रक्रिया तथा करण- उपकरण विवेक को समझा। आज हम…

‘एक पिता एकम के हम बारिक’ की शिक्षा देता श्री गुरुग्रंथ साहिब

 – हरमिंदर सिंह मलिक श्री गुरुग्रन्थ साहिब परमात्मा का शाब्दिक स्वरूप है। मानवीय आदर्श मूल्यों का अथाह कोष है। गुरु ग्रन्थ साहिब प्रत्येक शब्द मनुष्यों…

अखण्ड भारत का संकल्प और स्वतंत्रता का सही अर्थ

– रवि कुमार 15 अगस्त का दिन कहता आजादी अभी अधूरी है। सपने सच होने बाकी है रावी की शपथ न पूरी है।। उपरोक्त पंक्तियां…

पांच अगस्त, पांच सौ वर्षों का संघर्ष और साधना : श्रीराम जन्मभूमि

 – पिंकेश लता रघुवंशी अपि स्वर्णमयी लङ्का न मे लक्ष्मण रोचते । जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ॥ लंका विजयोपरांत लंका के वैभव और बनावट देख…

संत श्रेष्ठ ज्ञानेश्वर महाराज – 12 अगस्त जयंती विशेष

 – डॉ० आशीष पुराणिक 15 वर्ष का छोटा बालक पैठण धर्मपीठ को नम्रता से प्रश्न करता है, “आपके अन्नमय शरीर से मेरे अन्नमय शरीर को…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-14 (करण-उपकरण-विवेक)

 – वासुदेव प्रजापति संस्कृत शब्द करण से हम भली-भाँति परिचित हैं। करण के आगे उप उपसर्ग लगने से उपकरण शब्द बनता है। करण का अर्थ…

सारे जगत में स्वयं को और स्वयं में सारे जगत को देखने की दृष्टि भारत की है – सरसंघचालक मोहन भागवत

श्रीराम मंदिर निर्माण कार्य शुभारंभ कार्यक्रम में पू. सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का उद्बोधन श्रद्धेय महंत नृत्यगोपाल जी महाराज सहित उपस्थित सभी संत चरण,…