सा विद्या या विमुक्तये
– अवनीश भटनागर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने अपना कार्य अक्टूबर, 1917 में प्रारम्भ किया था। विश्वविद्यालय के बारहवें उपाधि-वितरण समारोह (14 दिसम्बर 1929 ई॰) के…
– वासुदेव प्रजापति भिक्षा नाम सुनते ही हमारे मन में हेय भाव आता है। क्यों? इसलिए कि भिक्षा मांगने वाला बिना किसी मेहनत के और…
– डॉ शिवभूषण त्रिपाठी एक ही परमात्मा-सत्ता सर्वत्र विद्यमान है। अतल, वितल, सुतल, तलातल, रसातल, महातम, पाताल और भू: भुव: स्व:, मह, जन:, तप:, सत्यम्-…
– वासुदेव प्रजापति भारतीय शिक्षा व्यवस्था आज की शिक्षा व्यवस्था से अनेक बातों में श्रेष्ठ है। भारत में शिक्षा का विचार अर्थ के साथ जोड़कर…
– वासुदेव प्रजापति आज देश के गाँव-गाँव तथा गली-गली में विद्यालय खुलते जा रहे हैं। क्यों? क्योंकि हमने शिक्षा को व्यवसाय बना लिया है।…
– वासुदेव प्रजापति अध्यापन ( पढ़ाना ) अध्ययन अर्थात् पढ़ना और अध्यापन अर्थात् पढ़ाना। पढ़ना और पढ़ाना दोनों एक ही क्रिया के दो पद हैं।…
– हितेश शंकर संगठन का अंकुर व्यक्ति की आकांक्षा से फूटता है। ज्यादातर संगठन किसी एक विषय, किसी एक या परस्पर जुड़े क्षेत्रों में, एक…
– वासुदेव प्रजापति अध्ययन (पढ़ना) अध्ययन का अर्थ है, “पढ़ना”। पढ़ना और पढ़ाना या अध्ययन और अध्यापन एक ही क्रिया के दो स्वरूप हैं। हम…
– वासुदेव प्रजापति आज के समय में सामान्य व्यक्ति भी यह कहता है कि हमारे जमाने में आचार्य-छात्र सम्बन्ध जितने मधुर थे, वैसे आज नहीं…
– Dr Kuldeep Mehandiratta Bhartiya perspective of education, ‘Sa Vidya Ya Vimuktya’, denotes education as the way which liberates human beings. Pandit Deen Dayal…