– रवि कुमार 10 मई 1857 को प्रारंभ हुआ स्वतंत्रता समर 1859 आते-आते समाप्त हो गया। क्या देशभक्ति का ज्वार मात्र दो वर्ष में ही…
Category: अमृत महोत्सव
भारतीय भाषाओं (कन्नड़, बंगला, ओड़िया और असमिया) का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान – 2
– डॉ. कुलदीप मेहंदीरत्ता कन्नड़ भाषा का योगदान स्वतंत्रता संग्राम में कुछेक अपवादों को छोड़कर समाज जागरण और राष्ट्रीय चेतना के स्वर प्राय: प्रत्येक भाषा,…
भारतीय भाषाओं (तमिल और तेलुगु) का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान – 1
– डॉ. कुलदीप मेहंदीरत्ता भारत विविधताओं से भरा एक विशाल राष्ट्र है जहाँ भले ही भौगोलिक अथवा प्रयोज्य क्षेत्र के आधार पर शाब्दिक तथा भाषिक…
स्वतन्त्रता, समानता और बन्धुता के पुरोधा डॉक्टर भीमराव आंबेडकर
– निखिलेश महेश्वरी भारतीय सनातन संस्कृति अनादि, अनंत और चिर पुरातन है। अपनी सनातन संकृति ने अनेक उतार चढाव, संघर्ष के साथ अपने को सुरक्षित…
1857 की क्रांति का शंखनाद
– रवि कुमार देश की स्वतंत्रता के लिए एक साथ, एक समय प्रारम्भ होने वाली क्रांति का शंखनाद कैसे हुआ होगा? 31 मई 1857 के…
लाला लाजपत राय का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में योगदान
– डॉ कुलदीप मेहंदीरत्ता पंजाब केसरी और शेर-ए-पंजाब के नाम से विख्यात लाला लाजपत राय भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी सेनानियों में थे जिन्होंने व्यक्तिगत…
स्वतंत्रता संग्राम और बिरसा मुंडा का बलिदान
– मनोज कुमार 15 नवंबर 1857 को उलीहातू गांव (आज के खूंटी जिले) के अंतर्गत जन्म के उपरांत पूजा पाठ की विधि के पश्चात जब…
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक विनायक दामोदर सावरकर
– रत्नचंद सरदाना भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के देदीप्यमान नक्षत्र विनायक दामोदर का पुण्य स्मरण करते हुए शीश स्वत: ही श्रद्धानत हो जाता है। उनकी असंदिग्ध…
स्वतंत्रता आन्दोलन का जयघोष मंत्र वंदेमातरम्
-रवि कुमार स्वतंत्रता अमूल्य है और यह हमें अनथक प्रयासों के कारण मिली है। हमारी स्वतंत्रता के लिए हमारे पूर्वजों ने अपने जीवन का बलिदान…
1857 की क्रांति : एक सुनियोजित स्वातन्त्र्य संग्राम
– रवि कुमार भारत की स्वतंत्रता की चर्चा जब होती है तो ध्यान आता है उन क्रान्तिकारियों का, जिन्होंने स्वतंत्रता की बलि वेदी पर अपने…