✍ वासुदेव प्रजापति अंग्रेजों के भारत में आने तक हमारी शिक्षा व्यवस्था स्वायत्त थी। शिक्षा शिक्षक के अधीन थी और समाज के पोषण से चलती…
Author: राष्ट्रीय शिक्षा
सद्ज्ञान व उल्लास के साथ शौर्य का भी अनूठा पर्व है वसंत पंचमी
– पूनम नेगी जानना दिलचस्प हो कि वसंत पंचमी का पावन दिन जहां हमें ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती के विशेष पूजन अर्चन के…
दीक्षांत समारोह
✍ अतुल कोठारी दीक्षांत शब्द अपने आप में जहां एक ओर एक अवधि पर्यन्त प्राप्त ज्ञान अथवा नैपुण्य के एक पड़ाव का सूचक है, वहीं…
कृतज्ञता
✍ दिलीप वसंत बेतकेकर कृतज्ञ और कृतघ्न ये दो शब्द तो आपने सुने और पढ़ें भी होंगे। हमें जो कोई मदद करता है, उपकार करता…
जान की बाजी लगा दी बाजी राउत ने
– गोपाल माहेश्वरी राष्ट्रभक्ति के महाज्वार में उतर चुके जलपोत बड़े थे, तब कुछ नन्हे से नाविक भी ले नन्हीं पतवार लड़े थे।। यह वह…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 74 (भारतीय शिक्षा और अंग्रेजी षडयंत्र – 2)
✍ वासुदेव प्रजापति इतिहास को विकृत करने वाला जेम्स मिल दूसरा प्रयत्न हुआ भारतीय इतिहास की प्राचीनता को नकारने का। इस हेतु से उन्होंने दो…
भारतीय ज्ञान का खजाना-16 (हमारा श्रेय, जो हमसे छिन गया…)
✍ प्रशांत पोळ हाल ही में एक समाचार पत्र में यह समाचार प्रकाशित हुआ था कि विभिन्न प्रकार की खोज और शोध के अनुसार हमारी…
भारत बोध के रचनाकार जयशंकर प्रसाद
✍ डॉ. अजीत कुमार पुरी ईसा की उन्नीसवीं सदी का समय संपूर्ण विश्व में उथल-पुथल का समय है। एक ओर यूरोपीय देश भारतवर्ष आदि पूर्वी…
भारतीय संविधान में वर्णित मौलिक कर्तव्य – भाग एक
✍ डॉ. कुलदीप मेहंदीरत्ता यह मानव की प्रकृति है कि हम सब को अधिक से अधिक अधिकारों की प्राप्ति अच्छी लगती है। अधिकार सामान्यतया उन…
विस्मृति की परत हटाने वाले विपिनचन्द्र पाल
✍ कल्याण चक्रवर्ती और अरित्र घोष दस्तिदार राष्ट्रीय पुनर्जागरण की एक प्रवृत्ति साहित्य आश्रयी, इसे ‘भावसर्वस्व धारा’ कहते हैं। जबकि कई विचारकों ने इस विचार…