– वासुदेव प्रजापति मनो ब्रह्मेति व्यजानात् आपके ध्यान में आया होगा कि एक ही कथा निरन्तर चल रही है। पुत्र भृगु अपने पिता वरुण के…
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शिशु शिक्षा – 2 (वर्तमान अवधारणा एवं भारतीय अवधारणा)
– नम्रता दत्त जगद्गुरु शंकराचार्य जी ने शिक्षा के संदर्भ में कहा – ‘सा विद्या या विमुक्तये’। ‘शिक्ष’ धातु से उत्पन्न शिक्षा का अर्थ है…
संकीर्तन संजीवनी से समाज को चेतन करने वाले : श्री चैतन्य महाप्रभु
– गोपाल महेश्वरी “चैतन्य देव का ज्ञान सौर-ज्ञान था, ज्ञानसूर्य का प्रकाश था और उनके भीतर भक्तिचन्द्र की शीतल किरणें भी थी। ब्रह्मज्ञान और भक्ति…
संत तुकाराम यांचे जीवन दर्शन
– सौ. प्रांजली अजय आफळे अणुरेणिया थोकडा । तुका आकाशाएवढा ।।१।। या ओळीतच संत तुकारामांचे सूक्ष्मातून प्रचंडाकडे जाणारे समग्र, विस्तृत व व्यापक व्यक्तिचित्र दडले आहे।…
संत तुकाराम का जीवन दर्शन
– सौ. प्रांजली अजय आफळे अणूरेणिया थोकडा तुका आकाशाएवढा ।।१।। अर्थात् कभी अणु की तरह सूक्ष्म संत तुकाराम गगन की तरह असीम हो गये हैं।…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-29 (प्राणमय कोश का विकास)
– वासुदेव प्रजापति प्राणों ब्रह्मेति व्यजानात् इससे पूर्व की कथा में पिता वरुण के कहने पर भृगु ने तप किया और तप करके जाना कि…
स्वामी दयानन्द जी का शिक्षा दर्शन
– प्रो. बाबूराम स्वामी दयानंद जी के बचपन का नाम मूलशंकर था, उनका जन्म 1824 में काठियावाड़, गुजरात के टंकरा में हुआ था। बचपन से…
अपडेट और आउटडेट
– दिलीप वसंत बेतकेकर ‘मोबाइल फोन किस-किसके पास है?’ ऐसा पूछने पर अनेक लोग प्रश्नार्थक मुद्रा से देखने लगे। सभी ने हाथ ऊपर किये। फिर…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-28 (अन्नमय कोश का विकास)
– वासुदेव प्रजापति अब तक हमने जाना कि व्यक्तित्व विकास का भारतीय प्रतिमान है – “समग्र विकास प्रतिमान।” समग्र विकास प्रतिमान के दो आयाम हैं…
पाती बिटिया के नाम-21 (मेरी चार सलाह)
– डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया! इन दिनों तुमको लिखने-पढऩे का शौक चर्राया है। बेटे! आपकी आयु में सबको लिखने का अत्यधिक शौक रहता है…