– वासुदेव प्रजापति मन की शिक्षा से तात्पर्य है, सदाचार की शिक्षा, सद्गुणों की शिक्षा व चरित्र की शिक्षा। इन सबको मिलाकर एक ही शब्द…
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1857 के स्वातंत्र्य समर पर साहित्य रचना
– रवि कुमार 1857 के स्वातंत्र्य समर के बारे में जिन्होंने अध्ययन किया है उनके सामने इस महान समर का उल्लेख आता है तो मन-मस्तिष्क…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 62 (तंत्रज्ञान का सांस्कृतिक स्वरूप)
– वासुदेव प्रजापति विज्ञान की भांति तंत्र ज्ञान का भूत भी हमारे सिर पर चढ़कर बोल रहा है। यंत्रों के नये-नये आविष्कारों में हमें अपने…
लोकमान्य बाळ गंगाधर टिळक-आद्य “राष्ट्रीय शैक्षणिक क्रांतिकारक”
– डॉ. वसुधा विनोद देव लोकमान्य बाळ गंगाधर टिळक भारतीय असंतोषाचे जनक, उत्कृष्ट लेखक, धुरंधर राजकारणी, तत्वज्ञ, समाज सुधारक, श्रीमदभगवदगीतेचे भाष्यकार, थोर राष्ट्रभक्त, थोर द्रष्टे…
भोजन संस्कार का स्वास्थ्य पर प्रभाव
– रवि कुमार भोजन का भी एक संस्कार होता है। आजकल के भाग-दौड़ वाले जीवन में यह संस्कार धूमिल होता दिख रहा है। भोजन क्यों…
आचार्य – सांदीपनि कुल के सारस्वत अनुष्ठान का शलाका पुरुष
– शिरोमणि दुबे बन्धुओ! भारत दुनियां का अनादि राष्ट्र है। सर्वप्रथम अरुणाचल के आंगन में आदित्य देव की अरुणिम आभा सम्पूर्ण तेज के साथ…
शिक्षक कक्षा या विषय के नहीं, विद्यार्थी के!
– अवनीश भटनागर गुरु पूर्णिमा महोत्सव है। प्रतिवर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा को यह उत्सव मनाया जाता है। इसे उत्सव क्यों कहा जाए? क्योंकि…
हमारा सांस्कृतिक पर्व – गुरु पूर्णिमा
– वासुदेव प्रजापति हमारे देश में वैसे तो प्रत्येक दिन किसी न किसी व्रत, पर्व या त्योहार के नाम से जाना जाता है, किन्तु…
सार्थक जीवन – जीवन घोषाल
– गोपाल माहेश्वरी सत्याग्रहों की विनय की भाषा न जाने शांति की। धूर्त दुश्मन के लिए भाषा उचित बस क्रांति की।। बसंत पंचमी का दिन…