– रवि कुमार मित्रों अथवा परिचितों के यहाँ विवाह या शुभ कार्यक्रम का निमंत्रण मिलने पर सामान्यतः सम्मिलित होना होता है। आजकल यह कार्यक्रम अधिकतर…
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आदिकवि महर्षि वाल्मीकि कृत रामायण का परिचय
– धीरेंद्र झा आदि कवि महर्षि वाल्मीकि ने तमसा नदी के तट पर 24000 श्लोकों से निबद्ध रामायण नामक संस्कृत महाकाव्य की रचना की। इस…
अभ्यास क्यों करें
– दिलीप वसंत बेतकेकर हम खाते-पीते हैं, किस लिए? मौजमस्ती करते हैं, किस लिए? नहाना, सोना, किस लिए? खेल आदि किस कारण? क्यों? क्यों?……… ऐसे…
आचार्य रामचंद्र शुक्ल का साहित्य दर्शन
– डॉ. अशोक बत्रा आचार्य रामचंद्र शुक्ल हिंदी समीक्षा जगत के सर्वाधिक प्रामाणिक और उद्धरणीय समीक्षक हैं। यदि संस्कृत काव्यशास्त्र की परंपरा से आगे हिंदी…
लाल बहादुर शास्त्री जी के समय राष्ट्र की प्रगति
– डॉ० जितेंद्र कुमार लाल बहादुर शास्त्री अपने नाम की ही तरह अपनी मिट्टी, अपने गांव और इस देश के लाल थे। आज उनका शरीर…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 67 (शिक्षित समाज)
– वासुदेव प्रजापति जिस समाज में जितने अधिक शिक्षित व्यक्ति होते हैं, वह समाज उतना ही अधिक विकसित होता है। एक शिक्षित व्यक्ति अपनी भाषा…
भारतीय ज्ञान का खजाना-12 (भारत ही है प्लास्टिक सर्जरी का जनक)
– प्रशांत पोळ पहली बार दिल्ली में भाजपा की सरकार आए हुए बमुश्किल पांच महीने हो रहे थे। ठीक से कहें, तो वह दिन था,…
शिशु शिक्षा 32 – परिवार में मातृभाषा का वातावरण
– नम्रता दत्त शिशु अवस्था संस्कार ग्रहण करने की सर्वश्रेष्ठ अवस्था है क्यों और कैसे? – इसका बहुत कुछ चिन्तन गत सोपानों में किया गया।…
प्रेमचन्द्र का साहित्य दर्शन
– विकास कुमार पाठक हिन्दी कथा साहित्य को उसको उत्कर्ष तक पहुंचाने में प्रेमचन्द की केन्द्रीय भूमिका है। इसलिए ही जब हम गद्य साहित्य की…
ऐसे थे अपने प्रोफेसर राजेंद्र सिंह उपाख्य रज्जू भैया
– राजेंद्र सिंह बघेल कहते हैं इस धरा पर श्रेष्ठ जनों का अवतरण जनकल्याण, समाज कल्याण एवं देश को दिशा देने के लिए होता है।…