जोशीला लक्ष्मण जोशी

  – गोपाल माहेश्वरी प्राण छोड़े प्रण न तोड़े वीर कहलाते वही हैं। काँच बिखरे टूट कर, हर चोट हीरे ने सही है।। वह युग…

गिजुभाई बधेका की साहित्य रचनाएं

 – अनिल रावल गिजुभाई बधेका आधुनिक शिक्षा के ज्योतिर्धर है। पाठशाला में जब परंपरागत और रटने की शिक्षा दी जाती थी तब विद्यार्थी शिक्षा के…

आर्थिक क्षेत्र में भी राष्ट्रीयता का भाव होना आवश्यक – श्री दत्तोपंत ठेंगड़ी जयंती विशेष

  – प्रहलाद सबनानी श्री दत्तोपंत जी ठेंगड़ी का जन्म 10 नवम्बर, 1920 को, दीपावली के दिन, महाराष्ट्र के वर्धा जिले के आर्वी नामक ग्राम…

अध्ययन मजा, नहीं सजा

 – दिलीप वसंत बेतकेकर देखने में यह आता है कि सब लोग अपना घर तो साफ करते हैं पर कचरा इकठ्ठा करके बाहर कहीं भी…

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence)

 – रवि कुमार मानव सभ्यता में बुद्धि के विकास की बात कही गई है। पंच कोशीय विकास में विज्ञानमय कोश का विकास अर्थात बुद्धि का…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 69 (बालक शिक्षा और बालिका शिक्षा- भाग १)

 – वासुदेव प्रजापति शिक्षा क्षेत्र में आज सर्वत्र सहशिक्षा का बोलबाला है। बालक-बालिका ही नहीं अभिभावक भी सहशिक्षा के पक्ष में खड़े दिखाई देते हैं।…

Sister Nivedita “In whose veins the waves of Bharat-devotion used to run” on 28 October, special on Jayanti

– Priyamvada Madhukar Pandey Swami Vivekananda had told sister Nivedita that “For the future children of Bharat, you should become a mother, servant, and friend…

भगिनी निवेदिता का शिक्षा दर्शन

 – रेखा चुड़ासमा मार्गरेट नोबल ब्रिटेन की प्रख्यात शिक्षाविद् ई.स. 1884 में मार्गरेट नोबल ने अपना शिक्षण व्यवसाय प्रारंभ किया, उसका परिचय पेस्टलोजी और फ्रोबेल…

राम की दीवाली

 – गोपाल माहेश्वरी दीपावली का दिन था पर राम प्रातः से ही अनमना बैठा था। त्योहार था पर मन में उत्साह नहीं था। वस्तुतः कोरोनाकाल…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 68 (औपचारिक-अनौपचारिक शिक्षा तंत्र)

 – वासुदेव प्रजापति आज शिक्षा क्षेत्र में औपचारिक और अनौपचारिक शब्दों का प्रयोग बहुत होता है, किन्तु इन दोनों शब्दों के सही अर्थ के बारे…