✍ दिलीप वसंत बेतकेकर धोंडोजी और गुंड्रोजी एक बार रास्ते में मिले, आपस में बातचीत होने लगी! धोंडोजी गुंडों जी से पूछने लगे- कहो गुंडों…
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दृढ़ निश्चयी बालाजी
✍ गोपाल माहेश्वरी चिंगारियाँ अंगार से जब आग लेकर छूटती हैं। बुझने से पहले वह समूचा वन जलाती लूटती हैं।। वह सारी रात जागा था…
भारतीय ज्ञान का खजाना-22 (लोहस्तंभ)
✍ प्रशांत पोळ दक्षिण दिल्ली से महरौली की दिशा में जाते समय दूर से ही हमें ‘कुतुब मीनार’ दिखने लगती है। 238 फीट ऊँची यह…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 86 (भौतिक आधार के दुष्परिणाम)
✍ वासुदेव प्रजापति पश्चिमी जीवन विचार और भारतीय जीवन विचार में आधारभूत अन्तर है। जहाँ पश्चिम ने भौतिकता को आधार बनाया है, वहीं भारत ने…
लज्जाराम तोमर कृत पंचपदी शिक्षण पद्धति
✍ विपिन राठी शिक्षा ही वह आधारशिला है जिस पर खड़े होकर कोई राष्ट्र विश्व का नेतृत्व करने में सक्षम हो सकता है। अतः किसी…
शिक्षार्थ संकल्प
शिक्षार्थ संकल्प संकल्प जो शिक्षण को सरल, सुगम व सुबोध बना देते हैं। ✍ राजेन्द्र सिंह बघेल विद्यालय मात्र इंटों से बना भवन नहीं या विभिन्न…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 85 (भारतीय परिवार परम्परा पर आघात)
✍ वासुदेव प्रजापति पश्चिम की व्यक्तिकेन्द्री व्यवस्था का दुष्परिणाम भारतीय स्त्रियों पर सर्वाधिक हुआ। स्त्रियों पर हुए दुष्परिणामों का असर परिवार इकाई पर होना स्वाभाविक…
नागार्जुन का साहित्यिक परिचय
✍ डॉ. मीरा कुमारी वैद्यनाथ मिश्र जो नागार्जुन के नाम से प्रसिद्ध हुए। इनका जन्म 30 जून 1911 में उनके ननिहाल ‘सतलखा’ गाँव, मधुबनी जिले…
भारतीय ज्ञान का खजाना-21 (बाणस्तंभ)
✍ प्रशांत पोळ ‘इतिहास’ बड़ा चमत्कारी विषय है। इसको खोजते खोजते हमारा सामना ऐसी स्थिति से होता है कि हम आश्चर्य में पड़ जाते…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 84 (व्यक्तिकेन्द्री व्यवस्था के दुष्परिणाम)
✍ वासुदेव प्रजापति भारतीय शिक्षा का पश्चिमीकरण जिन सिद्धांतों के आधार पर किया गया, उनमें “व्यक्तिकेन्द्री जीवन रचना” प्रमुख सिद्धांत है। व्यक्तिकेन्द्री जीवन रचना से…