सा विद्या या विमुक्तये
✍ राजेन्द्र सिंह बघेल
प्रत्येक मनुष्य अपने द्वारा किए गए कार्य का अच्छा परिणाम चाहता है। इसके लिए वह विभिन्न प्रकार के प्रयत्न भी करता है। कार्य का नियोजन, उसे पूरा करने की प्रक्रिया, संसाधनों का समुचित प्रयोग तथा समय-समय पर किए गए कार्य का मूल्यांकन ये सभी उस कार्य को पूरा करने के उपक्रम हैं।
एक अच्छा कार्य करने वाले व्यक्ति के सम्मुख ये प्रश्न आते ही हैं। आइए उपर्युक्त कथन को एक आचार्य होने के नाते अपनी कक्षा में प्रयोग करें। वास्तव में ये लेख एक अनुभव से जुड़ा है। विद्याभारती झारखंड राज्य के जिला केंद्रों पर प्रवास के समय अनेक स्थानों पर ये तथ्य मेरे सामने आए। प्रवास के क्रम में एक दिन मैं बोकारो स्टील सिटी के अपने एक विद्यालय में था। विद्यालय में शैक्षणिक प्रगति के लिए प्रयत्नों की जानकारी करते समय विभिन्न कक्षाओं से जुड़े अनुभव पाठकों के समक्ष रख रहा हूँ।
पहला प्रसंग – कक्षा छह के हिंदी विषय में विशेषण पाठ के शिक्षण से जुड़ा
इस परिस्थिति में स्वाभाविक है कि आचार्य बहुत उत्साहित नहीं हुए। मेरे पास आकर ये कहने लगे कि मैंने प्रयास तो पूरा किया लेकिन लगता है कि बच्चे उसे समझ नहीं पाए। ऐसे में मैंने प्रोत्साहन देते हुए कहा कि कक्षा के पांच बच्चे तो अच्छा उत्तर दे रहे थे। देखिए फिर से एक प्रयत्न और कीजिए तथा सोचिए कि अच्छा परिणाम कैसे मिल सकता है? इसी क्रम में आचार्य जी ने फिर से विशेषण पाठ की जानकारी विद्यार्थियों के सम्मुख प्रस्तुत की। हाँ, इस बार उनके प्रयत्न में कुछ अधिक नवीनता थी और कक्षा के परिवेश से जुड़े हुए ही अनेक उदाहरण प्रस्तुत किए। उनके प्रयत्न इस प्रकार थे…
इससे अनेक बिंदु उभरकर आए –
दूसरा प्रयोग गणित विषय से संबंधित है –
कक्षा नौ में सांख्यिकी का पाठ पढ़ाने का आज तीसरा दिन था। विषय से संबंधित शिक्षण के क्रम में आज आचार्य जी ने तीन प्रश्न अभ्याय के लिए दिए। मैंने उनसे जानना चाहा कि ये तीन प्रश्न हल करने में बच्चों को कितना समय लगेगा। उनका कहना था कि आठ से दस मिनट में छात्र सभी प्रश्न हल कर लेंगे। प्रश्न हल करने के क्रम में जो दृश्य मेरे सामने उपस्थित हुआ, उसका विवरण इस प्रकार है।
संपूर्ण परिणाम आचार्य जी के सामने था। यद्यपि उनके कथन के अनुसार आठ से दस मिनट में सब बच्चे तीनों प्रश्न हल तो नहीं कर पाए लेकिन ये संपूर्ण विवरण जानकर वे आनंदित थे क्योंकि उन्होंने अनुभव किया कि……..
गणित की इस कक्षा के छात्रों की समझ, न्यूनतओं और उसके निरकरण का विवरण इस सारणी में है- कुल छात्र संख्या-40
प्रस्तुत लेख में किए गए प्रयोग व उनसे प्राप्त अनुभवों के आधार पर हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि…
(लेखक शिक्षाविद है और विद्या भारती के अखिल भारतीय प्रशिक्षण संयोजक रहे हैं।)
और पढ़ें : शिक्षक कक्षा या विषय के नहीं, विद्यार्थी के!
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