– ललित गर्ग सशक्त भारत-निर्माण एवं प्रभावी शिक्षा के लिए मातृभाषा में शिक्षा की सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका है। शिक्षा को अपने समाज एवं राष्ट्र के…
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति और नेशनल रिसर्च फाउन्डेशन (एन.आर.एफ.)
– डॉ० रविन्द्र नाथ तिवारी भारत भौगोलिक विविधता, जातीय बहुलता, भौतिक वातावरण में भिन्नता, आर्थिक विविधता और विश्व की सर्वाधिक युवा जनसंख्या वाले देश का…
पालक, पालय और पैसा
– दिलीप वसंत बेतकेकर “Money is a terrible master but an excellent servant.” “पैसा मालिक के रूप में भयानक है, परन्तु नौकर के रूप में…
पाती बिटिया के नाम-29 (दृढ़ निश्चय)
– डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया, ‘भारत’ प्रारंभ से ही बड़ा शांतिप्रिय और गंभीर स्वभाव वाला बालक था। ‘ना काहु से दोस्ती, ना काहु से…
सरस्वती शिशु मंदिर योजना और राणा प्रताप सिंह
– राजेन्द्र बघेल शिक्षा जगत में आज विद्या भारती और उसके महत्वपूर्ण योगदान की चर्चा सर्वदूर होती है। यह योजना स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात सुनियोजित…
शिशु शिक्षा – 8 – गर्भावस्था
– नम्रता दत्त गत सोपान में पूर्व गर्भावस्था की संक्षिप्त जानकारी से यह बात ध्यान में आई कि गर्भधारण के लिए किस प्रकार की…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-36 (राष्ट्रगत विकास)
– वासुदेव प्रजापति व्यष्टि और समष्टि के सम्बन्धों के अन्तर्गत हमने व्यक्ति और परिवार तथा व्यक्ति और समाज के सम्बन्धों को जाना। आज हम व्यक्ति…
संत कबीर का ज्ञान विमर्श
– डॉ० ऋतु भारतीय चिंतन परंपरा में ज्ञान अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्राचीन वाङमय में इस चिंतन की सुदीर्घ परंपरा उपलब्ध है। अनेक मनीषियों ने इस पर गहन चिंतन-मनन किया है।…
संत कबीर का शिक्षा-दर्शन
– डॉ. वन्दना शर्मा हिन्दी साहित्य के भक्तिकाल में संत कबीर प्रेम-प्लावित ज्ञानदीप लेकर एक शक्ति पुंज के रूप में अवतरित हुए। उन्होंने अपनी…
एक अलौकिक व्यक्तित्व छत्रपति शिवाजी
– श्रीराम आरावकर ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी विक्रमी संवत 1631 (6 जून 1674) का शुभ दिन। रायगढ़ में जनसमुदाय उत्साह की तरंगों पर मानो झूम कर…