स्वामी श्रद्धानन्द – भारतीय संस्कृति के गौरव के संरक्षक

  – डॉ० अश्वनी कुमार स्वामी श्रद्धानन्द का जन्म 2 फ़रवरी सन् 1856 (फाल्गुन कृष्ण त्र्योदशी, विक्रम संवत् 1913) को पंजाब प्रान्त के जालन्धर जिले…

1857 की क्रांति के प्रतिसाद

 – रवि कुमार 10 मई 1857 को प्रारंभ हुआ स्वतंत्रता समर 1859 आते-आते समाप्त हो गया। क्या देशभक्ति का ज्वार मात्र दो वर्ष में ही…

पाती बिटिया के नाम-39 (जाग उठे हैं गिरी-वनवासी)

 – डॉ विकास दवे जाग उठे हैं गिरी-वनवासी, जाग उठा है हिन्दुस्थान नहीं वस्त्र भोजन के भूखे, वनवासी चाहें सम्मान प्रिय बिटिया! एक बार स्वामी…

बाल केन्द्रित क्रिया आधारित शिक्षा- 30 (विद्यालय में विशेष आयोजन)

 – रवि कुमार   विद्यार्थियों में विशेष गुणों के विकास की दृष्टि से अनेक विशेष आयोजनों की योजना होती है। कुछ आयोजन उस वर्ष में…

भारतीय भाषाओं (कन्नड़, बंगला, ओड़िया और असमिया) का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान – 2

– डॉ. कुलदीप मेहंदीरत्ता कन्नड़ भाषा का योगदान स्वतंत्रता संग्राम में कुछेक अपवादों को छोड़कर समाज जागरण और राष्ट्रीय चेतना के स्वर प्राय: प्रत्येक भाषा,…

गीता में भाव-निष्पत्ति

 – डॉ. विन्ध्यवासिनी प्रसाद त्रिपाठी गीता ग्रन्थ वाग्यज्ञ का प्रसाद है। भगवान कृष्ण इसके प्रस्तोता हैं, ये ही इस यज्ञ के ब्रह्मा हैं,म ये ही…

लोकमान्य तिलक जी द्वारा लिखित ‘गीता रहस्य’ एक अद्भुत साहित्य कृति

 – डा. आशिष मुकंद पुराणिक लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने अपने जीवन काल में शिक्षा, राजनीति, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, अध्यात्म आदि ऐसे अनेक विषयों पर प्रस्तुतीकरण…

उच्चतर शिक्षा प्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन : एक अभिनव पहल

 – डा. रवीन्द्र नाथ तिवारी प्राचीन और सनातन भारतीय ज्ञान तथा विचार की समृद्ध परम्परा के साथ-साथ भारतवर्ष शिक्षा के क्षेत्र में विश्व का नेतृत्व…

ज्ञान की बात 47 (शिक्षा समाजनिष्ठ होती है)

 – वासुदेव प्रजापति शिक्षा के प्रयोजनों के अन्तर्गत हमने उसके सांस्कृतिक प्रयोजन एवं राष्ट्रीय प्रयोजन को जाना। आज हम शिक्षा के सामाजिक प्रयोजन को जानेंगे।…

सावधान, इस युगल से!

 – दिलीप वसंत बेतकेकर कुछ समय पूर्व की ही घटना है… समाचारपत्र में छपी थी… एक युगल के सम्बन्ध में…! वह युगल लोगों को लुभावने,…