✍ वासुदेव प्रजापति यंत्र मनुष्य जीवन का अभिन्न अंग बन गया है। बिना यंत्र के उसका जीवन चल नहीं सकता। प्रातः जगने से लेकर रात्रि…
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चिंतन और चेतना
✍ गोपाल माहेश्वरी चिंतन और चेतना सगे भाई-बहिन हैं। नाम का प्रभाव उनके विचारों पर भी स्पष्ट दिखाई देता है। पिताजी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 87 (शिक्षा का बाजारीकरण)
✍ वासुदेव प्रजापति हमारे देश में शिक्षा, चिकित्सा तथा धर्म अनादि काल से सेवा के क्षेत्र रहे हैं। सेवा से हमारा तात्पर्य आज की भाँति…
दृढ़ निश्चयी बालाजी
✍ गोपाल माहेश्वरी चिंगारियाँ अंगार से जब आग लेकर छूटती हैं। बुझने से पहले वह समूचा वन जलाती लूटती हैं।। वह सारी रात जागा था…
भारतीय ज्ञान का खजाना-22 (लोहस्तंभ)
✍ प्रशांत पोळ दक्षिण दिल्ली से महरौली की दिशा में जाते समय दूर से ही हमें ‘कुतुब मीनार’ दिखने लगती है। 238 फीट ऊँची यह…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 86 (भौतिक आधार के दुष्परिणाम)
✍ वासुदेव प्रजापति पश्चिमी जीवन विचार और भारतीय जीवन विचार में आधारभूत अन्तर है। जहाँ पश्चिम ने भौतिकता को आधार बनाया है, वहीं भारत ने…
लज्जाराम तोमर कृत पंचपदी शिक्षण पद्धति
✍ विपिन राठी शिक्षा ही वह आधारशिला है जिस पर खड़े होकर कोई राष्ट्र विश्व का नेतृत्व करने में सक्षम हो सकता है। अतः किसी…
शिशु शिक्षा 40 – क्षमताओं का विकास – भाग 2
✍ नम्रता दत्त श्रृंखला के इस सोपान में शिशु की बौद्धिक क्षमताओं अर्थात् विज्ञानमयकोश एवं आध्यात्मिक क्षमताओं अर्थात् आनन्दमयकोश के विकास पर संक्षिप्त चर्चा करेंगे।…
स्वयं दें मन को सूचना
✍ दिलीप वसंत बेतकेकर हम निरंतर बोलते रहते हैं- एक प्रकार से अन्य व्यक्ति के साथ जो तेज आवाज के साथ प्रक्रिया है। और दूसरे…
भारतीय ज्ञान का खजाना-21 (बाणस्तंभ)
✍ प्रशांत पोळ ‘इतिहास’ बड़ा चमत्कारी विषय है। इसको खोजते खोजते हमारा सामना ऐसी स्थिति से होता है कि हम आश्चर्य में पड़ जाते…