सा विद्या या विमुक्तये
✍ गोपाल माहेश्वरी देश में रह देश के जो शत्रुओं के मित्र हैं। उन शत्रुओं को दण्ड देना कर्म पुण्य पवित्र है। कोई विदेशी शत्रु…
✍ गोपाल माहेश्वरी रक्त में भीगी हुई वे लाल माटी पर पड़े थे, उम्र में छोटे सही वे लाल पर्वत से बड़े थे। जिस समय…
– गोपाल माहेश्वरी स्वातन्त्रय लक्ष्मी के चरण कुंकुम नहीं शोणित धुले हैं। अनगिनत बलिदान देकर माँ के ये बंधन खुले हैं।। स्वतंत्रता हमें तब तक…
– गोपाल माहेश्वरी प्राण छोड़े प्रण न तोड़े वीर कहलाते वही हैं। काँच बिखरे टूट कर, हर चोट हीरे ने सही है।। वह युग…
धन्य वे शिक्षक, सिखाते देश पर बलिदान होना। राष्ट्र पहले बाद में हम, ध्येय के हित प्राण खोना।। आपने विद्यालय के प्रधानाचार्य से उनके कक्ष…
– गोपाल माहेश्वरी छोटे-छोटे जौ-तिल-तण्डुल मिल आहुति बन जल जाते हैं। तो महायज्ञ में उपयोगी सहयोग सपफल कर पाते हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति के प्रयत्न शस्त्र…
– गोपाल माहेश्वरी देशद्रोही देश के दुश्मन से भी घातक अधिक है। राह के काँटे कुचलते जो बढ़ें हम वो पथिक हैं। “आजादी कभी गिड़गिड़ाते…
– गोपाल महेश्वरी ज्वालामुखी पिता की बेटी, ज्वाला बनकर ही पलती है। उसे कहाँ भय जल जाने का, जिसमें क्रांति-ज्वाल जलती है। भगवान की पूजा…