Srimanta Sankardeva: A great scholar and literary genius

 – Dr. Jagadindra Raychoudhury Mahapurush Srimanta Sankardeva was a great reformer of religion and he introduced a religion called Ek Saran Naam Dharma (devoting to…

आचार्य रामचंद्र शुक्ल का साहित्य दर्शन

 – डॉ. अशोक बत्रा आचार्य रामचंद्र शुक्ल हिंदी समीक्षा जगत के सर्वाधिक प्रामाणिक और उद्धरणीय समीक्षक हैं। यदि संस्कृत काव्यशास्त्र की परंपरा से आगे हिंदी…

लाल बहादुर शास्त्री जी के समय राष्ट्र की प्रगति

 – डॉ० जितेंद्र कुमार लाल बहादुर शास्त्री अपने नाम की ही तरह अपनी मिट्टी, अपने गांव और इस देश के लाल थे। आज उनका शरीर…

दीनदयाल उपाध्याय की दृष्टि में भारतीय शिक्षा

 – डॉ. राकेश दुबे दीनदयाल जी की दृष्टि में भारतीय शिक्षा विषय पर विचार करते हुए कुछ प्रश्न स्वभावत: मन में उठते हैं जैसे किसी…

प्रेमचन्द्र का साहित्य दर्शन

– विकास कुमार पाठक हिन्दी कथा साहित्य को उसको उत्कर्ष तक पहुंचाने में प्रेमचन्द की केन्द्रीय भूमिका है। इसलिए ही जब हम गद्य साहित्य की…

भारतेंदु हरीशचन्द्र का साहित्य दर्शन

 – डॉ. कुलदीप मेहंदीरत्ता भारतवर्ष के इतिहास में उन्नीसवीं सदी का महत्त्वपूर्ण स्थान है। 1600 ईस्वी के बाद धीरे-धीरे भारत को कब्जाते जा रहे अंग्रेजों…

श्रीकृष्ण सच्चे अर्थों में राष्ट्रनायक हैं

– ललित गर्ग भगवान श्रीकृष्ण हमारी संस्कृति के एक अद्भुत एवं विलक्षण राष्ट्रनायक हैं। श्रीकृष्ण का चरित्र एक लोकनायक का चरित्र है। वह द्वारिका के…

रामकृष्ण परमहंस का शिक्षा दर्शन

– सतीश कुमार इक्कीसवीं शताब्दी में शिक्षा का जितना महत्व है, उससे ज्यादा उतना ही महत्व शिक्षा कहाँ से ग्रहण की जा रही हैं उसका…

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का शिक्षा दर्शन

– डॉ. कुलदीप मेहंदीरत्ता “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और में इसे लेकर रहूँगा” की उद्‌घोषणा करने वाले तिलक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख क्रांतिकारियों…

लोकमान्य बाळ गंगाधर टिळक-आद्य “राष्ट्रीय शैक्षणिक क्रांतिकारक”

 – डॉ. वसुधा विनोद देव लोकमान्य बाळ गंगाधर टिळक भारतीय असंतोषाचे जनक, उत्कृष्ट लेखक, धुरंधर राजकारणी, तत्वज्ञ, समाज सुधारक, श्रीमदभगवदगीतेचे भाष्यकार, थोर राष्ट्रभक्त, थोर द्रष्टे…