– গোপাল চন্দ্র হালদার শ্রী শ্রী ঠাকুর রামকৃষ্ণদেবের — অন্যতম গৃহী ভক্ত ছিলেন শ্রীযুক্ত অধরলাল সেন । পেশায় ছিলেন ডেপুটি ম্যাজিস্ট্রেট। ১৮৮৪খ্রীষ্টাব্দের ৬ই ডিসেম্বর। ঠাকুর…
Category: व्यक्तित्व
भारतीय शिक्षा का दार्शनिक आधार
– शिव कुमार शर्मा शिक्षा मनुष्य का परिष्कार करती है। शिक्षा ही उसके गुणों का संवर्द्धन कर देवत्व की ओर प्रेरित करती है। किन्तु शिक्षा…
एक महान नदी और नारी का मिलन स्थल महेश्वर
– गोपाल महेश्वरी परम पुरातन दिव्य सनातन देवभूमि भारत के मनोहर मध्य क्षेत्र को ही वर्तमान युगीन मध्य प्रदेश कहते हैं। मालवा और नीमाड़…
भारतीय क्रांति के महानायक – वीर सावरकर
– मृत्युंजय दीक्षित “मुझे प्रसन्नता है कि मुझे दो जन्मों के कालापानी की सजा देकर अंग्रेज़ सरकार ने हिंदुत्व के पुनर्जन्म सिद्धांत को मान…
पं० हजारी प्रसाद द्विवेदी का साहित्य दर्शन
पं० हजारी प्रसाद द्विवेदी जी का हिंदी साहित्य में अत्यंत विशिष्ट तथा सराहनीय योगदान रहा है। द्विवेदी जी निबंधकार, आलोचक और उपन्यासकार थे। लगभग सभी…
शांति और प्रेम का संदेश देती है बुद्ध पूर्णिमा
– मृत्युंजय दीक्षित वैशाख मास की पूर्णिमा का भारतीय संस्कृति व बौद्ध समाज में अद्वितीय स्थान है। न केवल बौद्ध धर्म में आस्था रखने वाले…
स्वामी विवेकानन्द का शिक्षा दर्शन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति
– डॉ. रवीन्द्र नाथ तिवारी स्वामी विवेकानन्द महान चिन्तक, दार्शनिक एवं भारतीय सनातन संस्कृति के पुरोधा थे। धार्मिक एवं आध्यात्मिक प्रवृति उन्हें विरासत में मिली…
महान शिक्षाविद व समाज सुधारक महात्मा हंसराज का जीवन-दर्शन
– डॉ. सुरेन्द्र कुमार बिश्नोई उन्नीसवीं शताब्दी के अंत में जिन महापुरुषों ने देश में शिक्षा व समाज-सुधार के क्षेत्र में महान योगदान दिया उनमें…
Bankim Chandra Chatterjee and Vande Mataram
– Jagadindra Raychoudhury British came to India as the East India Company for some business purpose and during that time India was divided into some…
स्वामी भारती कृष्ण तीर्थ और वैदिक गणित
– स्वामी भारती कृष्ण तीर्थ का जन्म 14 मार्च 1884 (चैत्र शुक्ल तृतीया) को तिन्निवेलि (Tinnevally) तमिलनाडु में एक विद्या-विनय सम्पन्न परिवार में हुआ था।…