सरस्वती शिशु मंदिर योजना और राणा प्रताप सिंह

 – राजेन्द्र बघेल शिक्षा जगत में आज विद्या भारती और उसके महत्वपूर्ण योगदान की चर्चा सर्वदूर होती है। यह योजना स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात सुनियोजित…

शिशु शिक्षा – 8 – गर्भावस्था

– नम्रता दत्त   गत सोपान में पूर्व गर्भावस्था की संक्षिप्त जानकारी से यह बात ध्यान में आई कि गर्भधारण के लिए किस प्रकार की…

संत कबीर का ज्ञान विमर्श

– डॉ० ऋतु भारतीय चिंतन परंपरा में ज्ञान अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्राचीन वाङमय में इस चिंतन की सुदीर्घ परंपरा उपलब्ध है। अनेक मनीषियों ने इस पर गहन चिंतन-मनन किया है।…

संत कबीर का शिक्षा-दर्शन

 – डॉ. वन्दना शर्मा   हिन्दी साहित्य के भक्तिकाल में संत कबीर प्रेम-प्लावित ज्ञानदीप लेकर एक शक्ति पुंज के रूप में अवतरित हुए। उन्होंने अपनी…

एक अलौकिक व्यक्तित्व छत्रपति शिवाजी

– श्रीराम आरावकर ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी विक्रमी संवत 1631 (6 जून 1674) का शुभ दिन। रायगढ़ में जनसमुदाय उत्साह की तरंगों पर मानो झूम कर…

पाती बिटिया के नाम-28 (आओ करें!)

 – डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया, आज आपको दो घटनाएं सुनाने जा रहा हूँ। घटनाएँ हैं तो छोटी-छोटी किन्तु अपने में बहुत बड़े संदेश छुपाए…

रानी लक्ष्मीबाई का बलिदान हमेशा याद रहेगा

– निखिलेश महेश्वरी “सती होने से अच्छा है नारी शस्त्रु से युद्ध भूमि में उसका दमन करते हुए अपने प्राणोत्सर्ग करे।” भारत के इतिहास को…

शिशु शिक्षा – 7 – पूर्व गर्भावस्था

– नम्रता दत्त भारतीय दर्शन में शैशवास्था को शून्य से पांच वर्ष माना गया है। इसीलिए स्वामी शंकराचार्य जी ने कहा – लालयेत् पंचवर्षाणि, दश…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-35 (समाजगत विकास)

 – वासुदेव प्रजापति इससे पूर्व हमने व्यष्टि, समष्टि, सृष्टि व परमेष्ठी नामक चारों संज्ञाओं का अर्थ समझा। समष्टि के चार चरण – परिवार, समाज, राष्ट्र…

राष्ट्रीय शिक्षा नीति और शिक्षक

– डॉ० रविन्द्र नाथ तिवारी भारतीय संस्कृति और दर्शन का विश्व में बड़ा प्रभाव रहा है, इस समृद्ध विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए…