– नम्रता दत्त भारतीय दर्शन में शैशवास्था को शून्य से पांच वर्ष माना गया है। इसीलिए स्वामी शंकराचार्य जी ने कहा – लालयेत् पंचवर्षाणि, दश…
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भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-35 (समाजगत विकास)
– वासुदेव प्रजापति इससे पूर्व हमने व्यष्टि, समष्टि, सृष्टि व परमेष्ठी नामक चारों संज्ञाओं का अर्थ समझा। समष्टि के चार चरण – परिवार, समाज, राष्ट्र…
राष्ट्रीय शिक्षा नीति और शिक्षक
– डॉ० रविन्द्र नाथ तिवारी भारतीय संस्कृति और दर्शन का विश्व में बड़ा प्रभाव रहा है, इस समृद्ध विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए…
अमर बलिदानी भगवान बिरसा मुंडा
– डॉ कुलदीप मेहंदीरत्ता अंग्रेजों के शासन के विरुद्ध भारत देश के विभिन्न भौगोलिक प्रदेशों में और सामाजिक वर्गों ने स्वतन्त्रता प्राप्त करने के लिए…
बच्चों की प्रगति पुस्तिका का अध्ययन
– दिलीप वसंत बेतकेकर तिमाही परीक्षा के पश्चात प्रगति पुस्तक पर पालकों के हस्ताक्षर लेकर छठी कक्षा के विद्यार्थी, अपनी कक्षा अध्यापिका के पास, प्रगति…
नदियों के मर्म को सुनना ही होगा
– डॉ० रविन्द्र नाथ तिवारी नदियों के देश कहे जाने वाले भारत में मुख्यतः चार नदी प्रणालियाँ हैं। उत्तर भारत में सिंधु, मध्य भारत में…
पाती बिटिया के नाम-27 (न दैन्यं, न पलायनम्)
– डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया! अपने इस राष्ट्र की ख्याति शांति के प्रसार के लिए विश्वभर में रही है। इतिहास के अनेक ज्ञात-अज्ञात प्रसंगों…
शिशु शिक्षा – 6 – शिशु विकास की विभिन्न अवस्थाएं
– नम्रता दत्त इस सृष्टि में जो भी सजीव जन्म लेता है वह सतत् विकसित होता है अतः उसकी अवस्थाओं में परिवर्तन होना स्वाभाविक ही…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-34 (परिवारगत विकास)
– वासुदेव प्रजापति व्यक्ति अकेला नहीं रह सकता। उसका जीवन जिन पर निर्भर है, उन सबके साथ वह तालमेल बिठाकर रहता है। व्यक्ति का जीवन…
वह अमर छलांग – स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर
– गोपाल महेश्वरी पानी पर लिखी हुई बातें लिखते- लिखते बह जाती हैं। नहीं शेष उनकी किंचित स्मृतियाँ भी रह जाती हैं। पर एक सदी…