शिशु शिक्षा 32 – परिवार में मातृभाषा का वातावरण

 – नम्रता दत्त शिशु अवस्था संस्कार ग्रहण करने की सर्वश्रेष्ठ अवस्था है क्यों और कैसे? – इसका बहुत कुछ चिन्तन गत सोपानों में किया गया।…

दीनदयाल उपाध्याय की दृष्टि में भारतीय शिक्षा

 – डॉ. राकेश दुबे दीनदयाल जी की दृष्टि में भारतीय शिक्षा विषय पर विचार करते हुए कुछ प्रश्न स्वभावत: मन में उठते हैं जैसे किसी…

प्रेमचन्द्र का साहित्य दर्शन

– विकास कुमार पाठक हिन्दी कथा साहित्य को उसको उत्कर्ष तक पहुंचाने में प्रेमचन्द की केन्द्रीय भूमिका है। इसलिए ही जब हम गद्य साहित्य की…

ऐसे थे अपने प्रोफेसर राजेंद्र सिंह उपाख्य रज्जू भैया

 – राजेंद्र सिंह बघेल कहते हैं इस धरा पर श्रेष्ठ जनों का अवतरण जनकल्याण, समाज कल्याण एवं देश को दिशा देने के लिए होता है।…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 66 (शिक्षित व्यक्ति)

 – वासुदेव प्रजापति हमारे समाज में शिक्षित व्यक्ति का महत्त्व सदैव रहा है। यदि कोई व्यक्ति अशिक्षित है, तो समाज में उसे कभी मान-सम्मान प्राप्त…

स्वास्थ्य पर वायु का प्रभाव

– रवि कुमार दो व्यक्ति अलग-अलग कक्ष में सोए हुए हैं। एक कक्ष में खिड़की दरवाजे बंद है, ए.सी. चल रहा है। दूसरे कक्ष में…

शांति घोष-सुनीति चौधुरी

धन्य वे शिक्षक, सिखाते देश पर बलिदान होना। राष्ट्र पहले बाद में हम, ध्येय के हित प्राण खोना।। आपने विद्यालय के प्रधानाचार्य से उनके कक्ष…

भारतेंदु हरीशचन्द्र का साहित्य दर्शन

 – डॉ. कुलदीप मेहंदीरत्ता भारतवर्ष के इतिहास में उन्नीसवीं सदी का महत्त्वपूर्ण स्थान है। 1600 ईस्वी के बाद धीरे-धीरे भारत को कब्जाते जा रहे अंग्रेजों…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 65 (शास्त्र की शिक्षा)

 –  वासुदेव प्रजापति जीवन में जितनी महत्त्वपूर्ण मन की शिक्षा और कर्म की शिक्षा है, उतनी ही महत्त्वपूर्ण शास्त्र की शिक्षा भी है। जहाँ मन…

शिशु शिक्षा 31 – सजीव सृष्टि से आत्मीय परिचय

 – नम्रता दत्त ‘शिक्षा’ मात्र पुस्तकीय ज्ञान लेना नहीं अपितु जीवन जीने की कला को जानना है। शिक्षा वही है जो जीवन के व्यवहार में…