– अवनीश भटनागर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक परम पूज्य माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर उपाख्य श्री गुरुजी कुशल संगठक होने के साथ-साथ समाज जीवन के…
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पाती बिटिया के नाम-42 (समभाव ऐसा होता है)
– डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया! हम सबके जीवन में ऐसे अनेक प्रसंग आते हैं जब अनायास हमारी भेंट किसी ऐसे व्यक्तित्व से हो जाती…
उचित आहार से ‘स्वस्थ बालक स्वस्थ राष्ट्र’
– रवि कुमार एक स्थान पर अखिल भारतीय बैठक के लिए रेल यात्रा में जाना हुआ। रेल के डिब्बे में एक पति-पत्नी एवं उनके साथ…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 52 (विषयों में परस्पर सम्बन्ध)
– वासुदेव प्रजापति आज विद्यालयों व महाविद्यालयों में पढ़ाए जाने वाले सभी विषयों का सम्बन्ध शास्त्रों से है। सभी शास्त्र परस्पर एक दूसरे से सम्बन्धित…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 51 (शास्त्रों की रचना एवं स्वरूप)
– वासुदेव प्रजापति अब तक हमने जाना कि परमात्मा की इस सृष्टि में मनुष्य का अति विशिष्ट स्थान है। क्योंकि केवल मनुष्य में ही…
परिवार हो समाज पोषक
– दिलीप वसंत बेतकेकर औद्योगिक क्रांति के पश्चात जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अत्यधिक परिवर्तन हुए। परिवार प्रबन्धन भी अपवाद नहीं रहा। अनेक देशों में…
भारतीय भाषाओं का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान – 4
– डॉ. कुलदीप मेहंदीरत्ता भाषा के बिना एक मनुष्य का दूसरे मनुष्य से सार्थक संवाद होना एक अत्यंत दुष्कर कार्य है अत: भाषाओं…
पाती बिटिया के नाम-41 (राष्ट्र भाषा के प्रयोग का आग्रह)
– डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया! गत पत्र से हमारी बातचीत का क्रम प्रारम्भ हुआ था कुछ स्मरणीय मुलाकातों का। आओ इस बार चर्चा करें…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 50 (विषयों का अंगांगी सम्बन्ध)
– वासुदेव प्रजापति आज की शिक्षा व्यवस्था में सभी पठनीय विषयों को समान महत्त्व दिया जाता है। सभी विषय समान महत्त्व के नहीं हो सकते,…
वीर सावरकर कृत ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ पुस्तक का इतिहास
– रवि कुमार कहते हैं 1857 की क्रांति विफल हुई। क्या यह कहना सही है? नहीं! 1857 का महासंग्राम उसके बाद की पीढ़ियों को स्वतंत्रता…