– वासुदेव प्रजापति भारतीय ज्ञानधारा का मूल अधिष्ठान अध्यात्म है। अध्यात्म जब नियम व व्यवस्था में रूपान्तरित होता है, तब वह धर्म का स्वरूप…
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भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 53 (शिक्षा में अंगांगी भाव का विचार)
– वासुदेव प्रजापति अब तक हमने अंगांगी भाव को विभिन्न आयामों में समझा है। आज हम अंग और अंगी के सम्बन्ध में आवश्यक अनिवार्यताओं को…
उत्तम आहार के रूप में जल का सेवन
– रवि कुमार ‘जल ही जीवन है’, ‘बिन पानी सब सून’, ‘कोस कोस पर बदले पानी’, ‘जल है तो कल है’ आदि अनेक कहावतें हमने…
नारी स्वातंत्र्य का भारतीय प्रतिमानः सावित्री बाई फुले
– अवनीश भटनागर समाज में सदियों से चली आ रही रूढ़ियों को समाप्त करने तथा सामाजिक व्यवस्था में परिवर्तन लाने के लिए दो बातें अत्यन्त…
बच्चों के लिए शाला का चयन
– दिलीप वसंत बेतकेकर “प्रवेश प्रारम्भ! सीमित स्थान! प्रथम आने वाले को प्रथम प्रवेश! आज ही अपना नाम पंजीकृत कराएं!” किसी व्यवसाय या कम्पनी से…
पाती बिटिया के नाम-43 (पुरुषार्थ और प्रतिभा)
– डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया! हम यदि एक बार दृढ़ निश्चय कर लें और श्रमनिष्ठा हृदय में हो तो सफलताएँ स्वयं चलकर चरण चूमती…
1857 प्रथम स्वातंत्र्य समर में हरियाणा का योगदान
– रवि कुमार कहते हैं कि 1857 मात्र एक सैनिक विद्रोह था। अर्थात इसमें केवल सैनिकों ने ही भाग लिया था। वस्तुस्थिति ऐसी नहीं है।…
अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है आहार संयम
– रवि कुमार “आरोग्यं परमं भाग्यं स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनम्” अर्थात आरोग्य परम भाग्य है और स्वास्थ्य से अन्य सभी कार्य सिद्ध होते हैं। अच्छे स्वास्थ्य के…
भ्रान्तियों के निवारण का महापर्व : आजादी का अमृत महोत्सव – 2
एक और अटपटा किन्तु विचारणीय प्रश्न जब हम यह चर्चा कर रहे हो कि भारत पराधीन कब हुआ, तो यह विचार करना भी समीचीन…
भ्रान्तियों के निवारण का महापर्व : आजादी का अमृत महोत्सव – 1
– अवनीश भटनागर हम में से अधिकांश सौभाग्यशाली हैं कि हमारा जन्म स्वतंत्र भारत में हुआ है। जिनका जन्म 20 वीं शताब्दी में हुआ है,…