जीवन में ‘स्व’ का बोध और ‘स्व’ के आधार पर समाज रचना

 – डॉ. कृष्णगोपाल सह सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज में जीवित रहने का मूल आधार ‘स्व’ है। स्व नहीं तो समाज भी नहीं रह सकता।…

नारी शक्ति वंदन: भारतीय चिंतन का दर्शन

 – डॉ. पिंकेश लता रघुवंशी “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।” मनु स्मृति में आया हुआ यह श्लोक महिला स्थिति को लेकर भारत के वास्तविक…

गीता प्रेस, गोरखपुर का सांस्कृतिक अवदान

✍ अवनीश भटनागर (श्रद्धेय भाई जी – श्री हनुमान प्रसाद जी पोद्दार की जन्मजयंती (17 सितम्बर) पर उनके द्वारा स्थापित वैचारिक क्रान्ति के आधार स्तम्भ…

Their Own Space Inventor – Our Bharatputriya

 ✍ Dr. Pinkesh Lata Raghuwanshi Women have faith…. Gain independence, gain everything, but do not lose that characteristic of women!  Swami Vivekananda How this comment…

भारतीय परम्परागत खेल : बाल विकास का सशक्त माध्यम

  ✍ अवनीश भटनागर उत्साह, जोश, मस्ती तथा रोमांच से भरपूर खेलकूद बच्चों को तो क्या, बड़ों को भी पसन्द हैं। दुनियाँ के सभी देशों में…

15 अगस्त 1947 – तत्कालीन समाचार पत्रों के झरोखों से

 ✍  विनोद जौहरी भारतवर्ष के इतिहास में 15 अगस्त 1947 का दिन सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक है जिसको हमने अपनी पाठ्य पुस्तकों और…

भारत विभाजन – त्रासदी, परिणाम व सावधानी

 ✍ राजेन्द्र सिंह बघेल   वे महान वीर आत्माएँ जो देश विभाजन के समय भयानक एवं विषम परिस्थितियों में फंसे अगणित निर्दोष लोगों की रक्षा…

सावरकर का साहित्य धर्म – भाग २

                                     ✍ गोपाल माहेश्वरी सावरकर का सम्पूर्ण लेखन अपने राष्ट्र और समाज की दुर्दशा से विमुक्ति के लिए गहन संवेदना और निवारण के उत्कट संकल्पों…

सावरकर का साहित्य धर्म – भाग १

    ✍ गोपाल माहेश्वरी स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर अर्वाचीन भारत के एक ऐसे विराट व्यक्तित्व हैं जिसके प्रत्येक आयाम को समन्वित रूप से देखें या…

शिक्षा की निष्पत्ति – अखंड व्यक्तित्व का निर्माण

✍ आचार्य श्रीतुलसी जीवन जीना एक बात है और विशिष्ट जीवन जीना दूसरी बात है। ऐसा जीवन जो दुसरों के लिये उदाहरण बन सके, विशिष्ट…