✍ प्रणय कुमार यह भारत-भू वीर प्रसूता है। यहाँ हर युग, हर काल में ऐसे-ऐसे वीर-वीरांगनाओं ने जन्म लिया, जिनके व्यक्तित्व एवं कर्त्तृत्व के आगे…
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21वीं शताब्दी का शिक्षक
✍ किशन वीर सिंह शाक्य 21वीं शताब्दी का शिक्षक हमारी कल्पना में कुछ विशेष है क्योंकि 21वीं शताब्दी में हमारे लिए करने के लिए अनेक…
हॉकी के जादूगर मेजर ध्यान चंद – 29 अगस्त राष्ट्रीय खेल दिवस विशेष
✍ मुखतेज बधेशा 29 अगस्त 1905 को प्रयागराज में जन्मे मेजर ध्यानचंद का हॉकी के खेल में पूरी दुनिया में कोई सानी नहीं था, उन्होंने…
अष्टावधानी अध्यापकम्
मूल लेखकः (मराठी) दिलीप वसंत बेतकेकर अनुवादः (हिन्दी) डॉ. रमेश चौगांवकर प्रत्येक विद्यार्थी की सामाजिक आर्थिक, पारिवारिक, सांस्कृतिक पृष्ठभूमि असमान रहती है। शिक्षक के लिए…
१५ अगस्त १९४७ के बाद…
✍ प्रशांत पोळ १५ अगस्त १९४७ को भारत तो स्वतंत्र हो गया.. विभाजित होकर..! परन्तु अब आगे क्या..? दुर्भाग्य से गांधीजी ने मुस्लिम लीग के…
भारतीय शिक्षा की सनातन दृष्टि
✍ शिरोमणि दुबे कोई भी देश बदलाव-विकास के रास्ते पर सरपट दौड़ता है जब उस देश की शिक्षा व्यवस्था में उस देश के साहित्य में…
शिक्षा में सुधारों की आवश्यकता – परिवर्तन की प्रतीक्षा में पाठ्यक्रम
✍ प्रणय कुमार किसी भी राष्ट्र का भविष्य शिक्षा पर निर्भर करता है। शिक्षा ही वह सुदृढ़ नींव है, जिस पर राष्ट्र रूपी भवन की…
कोठारी आयोग और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020
✍ प्रोफेसर रवीन्द्र नाथ तिवारी यह सार्वभौमिक सत्य है कि किसी भी राष्ट्र के समग्र विकास के लिए सदैव शिक्षा का स्थान सर्वोपरि रहा है।…
हल्दीघाटी युद्ध – महाराणा प्रताप का मुगलों के विरूद्ध संघर्ष का कीर्तिदायक प्रारम्भ
✍ नारायण उपाध्याय प्रातः स्मरणीय महाराणा प्रताप भारतीय स्वातंन्न्य के तात्विक प्रतीक है। स्वदेश व स्वधर्म की रक्षार्थ सीमित संसाधनों के बावजूद उस समय के…
स्व-बोध की सप्तपदी
✍ शिरोमणि दुबे कोई भी राष्ट्र जब अपने स्वबोध के विषय में विस्मृति का शिकार होने लगता है। जब सभ्य समाज अपनी सनातन परंपराओं पर…