सा विद्या या विमुक्तये
✍ शिरोमणि दुबे कोई भी देश बदलाव-विकास के रास्ते पर सरपट दौड़ता है जब उस देश की शिक्षा व्यवस्था में उस देश के साहित्य में…
✍ प्रणय कुमार किसी भी राष्ट्र का भविष्य शिक्षा पर निर्भर करता है। शिक्षा ही वह सुदृढ़ नींव है, जिस पर राष्ट्र रूपी भवन की…
✍ प्रोफेसर रवीन्द्र नाथ तिवारी यह सार्वभौमिक सत्य है कि किसी भी राष्ट्र के समग्र विकास के लिए सदैव शिक्षा का स्थान सर्वोपरि रहा है।…
✍ नारायण उपाध्याय प्रातः स्मरणीय महाराणा प्रताप भारतीय स्वातंन्न्य के तात्विक प्रतीक है। स्वदेश व स्वधर्म की रक्षार्थ सीमित संसाधनों के बावजूद उस समय के…
✍ शिरोमणि दुबे कोई भी राष्ट्र जब अपने स्वबोध के विषय में विस्मृति का शिकार होने लगता है। जब सभ्य समाज अपनी सनातन परंपराओं पर…
✍ D. Ramakrishna Rao Technology is now playing a bigger role in the present-day world. Now that it has engrossed every aspect of our lives.…
✍ वासुदेव प्रजापति जब हम अध्ययन-अनुसंधान विषय पर विचार करते हैं तो सबसे पहला विचारणीय बिन्दु प्रमाण व्यवस्था ध्यान में आता है। क्योंकि अध्ययन-अनुसंधान के…
✍ डॉ. धीरेन्द्र झा हमारा जीवन एक यज्ञ हैं। हम इसमें वायु, जल, अन्न तथा प्रकाश के रूप में ऊर्जा की आहुति डालते रहते हैं।…
✍ Laxmana Rao Ayachithula After independence of India, a few National Education Policies came up and to some extent the recommendations were implemented. Dr. D.…
✍ वासुदेव प्रजापति हिन्दू नववर्ष आदिकाल से मनाया जाने वाला सांस्कृतिक व ऐतिहासिक पर्व है। यह पर्व राष्ट्रीय बोध, हमारी प्राचीन वैज्ञानिकता एवं विश्व कल्याण…