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भारतीय ज्ञान का खजाना-29 (प्राचीन भारतीय खेल-३)
✍ प्रशांत पोळ विविध क्षेत्रों में, विविध आयामों में कभी हम विश्व में सर्वश्रेष्ठ थे, इस पर अधिकतर भारतीयों का विश्वास ही नहीं हैं। यह…
मात्र पेट भरने वाली शिक्षा नहीं, मनुष्यता का संस्कार देने वाली शिक्षा
– डॉ. मोहन भागवत विद्या भारती (सरस्वती शिक्षा संस्थान) छत्तीसगढ़ के रजत जयंती समारोह (23 नवम्बर 2015, रायपुर) में उद्बोधन 25 वर्ष परिश्रम से अपेक्षा…
लोकनायक गोस्वामी तुलसीदास
– चेतनानन्द समाज की व्यवस्था नष्ट होने पर, उसके पथ भ्रष्ट होने पर किसी न किसी महापुरुष का आर्विभाव हुआ है, जिसने सभी विरोधों को…
पाठ्यपुस्तकों में अप्रकट सच्चे भारतीय राष्ट्रनायक
– प्रणय कुमार वामपंथी बुद्धिजीवियों, इतिहासकारों एवं कथित इस्लामिक स्कॉलरों द्वारा कभी बाबर, कभी अकबर, कभी जहाँगीर, कभी औरंगजेब तो कभी टीपू सुल्तान को नायक…
गणगौर
– नीलू शेखावत राजस्थान के रंगीन पर्वों की यात्रा श्रावण की शुक्ला तीज से शुरू होकर चैत की शुक्ला तीज तक चलती है। तीज और…
जैन दर्शन का परिचय
– प्रो. आनंदप्रकाश त्रिपाठी जैन दर्शन में जैन शब्द जिन से बना है। जिन का मतलब होता है जितेन्द्रिय अर्थात जिन्होंने अपनी इंद्रियों को जीत…
आर्य समाज का परिचय
– प्रोफेसर बाबूराम (डी.लिट्.) भारत विश्व की प्राचीनतम तथा श्रेष्ठतम सभ्यता एवं संस्कृति के ऋषिप्रधान और कृषिप्रधान राष्ट्र के रूप में विश्वविख्यात रहा है। भारत…
स्वातन्त्र्य यज्ञ के कर्मवीर पं. माखनलाल चतुर्वेदी
– कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल स्वातंत्र्य का शंखनाद करने वाले भारतीय चेतना के प्रखर स्वर दादा माखनलाल चतुर्वेदी का नाम जब भी कहीं गूँजता है,…
स्वदेशी का पथ
– गोपाल माहेश्वरी देश उठेगा अपने पैरों निज गौरव के भान से। स्नेह भरा सम्मान जगाकर जिएं सुख सम्मान से। परावलंबी देश जगत में कभी…
भारतीय नववर्ष और त्यौहारों की उमंग
– डॉ. सौरभ मालवीय भारतीय नववर्ष के साथ अनेक त्यौहार आते हैं। इनमें चैत्र शुक्लादि, नवरेह, गुड़ी पड़वा, उगादि, साजिबु नोंगमा पांबा अथवा साजिबु चेराओबा…