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श्रीराम: शरणं मम
– चेतनानन्द सेवा तो हो, पर सेवा करने वाला दिखायी न दे, प्रदर्शन न हो, कर्तृत्त्व अभिमान न हो और परिणाम पाने की रंचमात्र भी…
राष्ट्रकवि माखनलाल चतुर्वेदी का साहित्य दर्शन
– शिरोमणि दुबे कोई चलता पद चिह्नों पर, कोई पद चिह्न बनाता है। जो राहों को खुद गढ़ता है, वही युगों तक गाया जाता है।…
सिंदूरी हनुमान
– गोपाल माहेश्वरी रोशन ने शाला से लोटते हुए रास्ते में सुना कि पहलगाम में आतंकी हमला हुआ है। निर्दोष पर्यटकों की हत्या से सारा…
सावित्रीबाई फुले का शैक्षिक दर्शन: छात्र केंद्रित शिक्षण
– प्रो. असित मंत्री सावित्रीबाई फुले का शैक्षिक दर्शन पंथनिरपेक्ष शिक्षा के साथ-साथ सार्वभौमिक शिक्षा पर जोर देता है। सावित्रीबाई फुले ने स्वयं को भारत…
रामकृष्ण मिशन का परिचय
– संतोष कुमार दिवाकर क्या रामकृष्ण मिशन केवल एक संस्थागत कदम था, या यह एक महामानव की उस असीमित दिव्य दृष्टि का प्रतिबिंब था, जो…
देश की बात-1 : अपनी बात
-वासुदेव प्रजापति बात आज से लगभग बीस-बाईस वर्ष पुरानी है। विद्या भारती जोधपुर प्रांत का अध्यक्ष-व्यवस्थापक सम्मेलन, बच्छराज व्यास आदर्श विद्या मंदिर डीडवाना में था।…
मनः स्थिति बनाम परिस्थिति
✍ दिलीप बेतकेकर शाला में एक खेल खेला जाता है रस्सा खींच। एक मजबूत रस्सी के दो सिरों की बाजू में दो समूह रस्सी को…
साधन और साधना
✍ दिलीप बेतकेकर महाभारत युद्ध प्रारंभ होने के पूर्व अर्जुन और दुर्योधन भगवान श्री कृष्ण से सहायता मांगने हेतु एक ही समय पर पहुंचे। श्रीकृष्ण…
Lessons on Education and Organisation from Swargeeya Ranga Hariji
– Sarath Edathil Ranga Hari, the great visionary whose intellectual brilliance radiated in the conceptual and idealistic areas of Vidyabharati departed this world on 29…
जीवन में रामत्व
– ऋचा सिंह श्रीराम को सनातन धर्म में विष्णु का अवतार माना गया है। लोग उनको भगवान और आराध्य मान कर पूजार्चन करते हैं। लेकिन…