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भारतीय शिक्षा के आध्यात्मिक आधार भाग एक

– ब्रज मोहन रामदेव ‘आध्यात्मिकता’ भारत राष्ट्र की विशेष संकल्पना है। हमारी यह मान्यता है कि सृष्टि रचना के मूल में आत्म तत्व है। यह…

संत कबीर – अनुभौ उतरयो पार!

-डॉ. अशोक बत्रा संत कबीर का जीवन ही दर्शन पर आधारित था। उन्होंने जो देखा, उसी को कहा। किसी किताब-विताब के चक़्कर में नहीं रहे।…

अनूठा श्राद्ध

 – गोपाल माहेश्वरी विद्यार्थी पाठक सरस्वती विद्या मंदिर से आचार्य के रूप में सेवा निवृत्त हुए एक वर्ष ही बीता था कि एक दिन उनके…

राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की भूमिका

– दिलीप बेतकेकर कार्य सभी महत्वपूर्ण तथा मूल्यवान ही होते हैं, कोई भी कार्य निम्न स्तर का नहीं। फिर भी शिक्षक का कार्य अनोखा है।…

भारतीय ज्ञान का खजाना-30 (प्राचीन भारतीय खेल-४)

✍ प्रशांत पोळ मलखंब ‘मलखंब’ यह हैं, शरीर, मन, बुद्धि का सर्वांगीण विकास करने वाला जबरदस्त खेल! यह भारत के बाहर ज्यादा प्रसिद्ध नहीं हुआ…

श्रीराम: शरणं मम

 – चेतनानन्द सेवा तो हो, पर सेवा करने वाला दिखायी न दे, प्रदर्शन न हो, कर्तृत्त्व अभिमान न हो और परिणाम पाने की रंचमात्र भी…

राष्ट्रकवि माखनलाल चतुर्वेदी का साहित्य दर्शन

 – शिरोमणि दुबे कोई चलता पद चिह्नों पर, कोई पद चिह्न बनाता है। जो राहों को खुद गढ़ता है, वही युगों तक गाया जाता है।…

सिंदूरी हनुमान

– गोपाल माहेश्वरी रोशन ने शाला से लोटते हुए रास्ते में सुना कि पहलगाम में आतंकी हमला हुआ है। निर्दोष पर्यटकों की हत्या से सारा…

सावित्रीबाई फुले का शैक्षिक दर्शन: छात्र केंद्रित शिक्षण

– प्रो. असित मंत्री सावित्रीबाई फुले का शैक्षिक दर्शन पंथनिरपेक्ष शिक्षा के साथ-साथ सार्वभौमिक शिक्षा पर जोर देता है। सावित्रीबाई फुले ने स्वयं को भारत…

रामकृष्ण मिशन का परिचय

– संतोष कुमार दिवाकर क्या रामकृष्ण मिशन केवल एक संस्थागत कदम था, या यह एक महामानव की उस असीमित दिव्य दृष्टि का प्रतिबिंब था, जो…