अच्छी कहानी है। संदेशप्रद है, नैतिक है। हमारे समय का दुर्भाग्य देखें कि इन रचनाओं को पाठ्यक्रम समिति के सदस्यगण यह कहकर ठुकरा देते हैं कि नैतिकता रचनाओं को बोझिल बनाती हैं, थोपी हुई लगती हैं। धरातल की गहरी समझ नहीं होने या वैचारिक संकीर्णता के कारण उन्हें इसका बोध नहीं कि भारतीय मानस ऐसी ही रचनाओं को पसंद करता है। लेखक को साधुवाद, संदेशप्रद कहानी है। प्रणय कुमार शिक्षक Reply