✍ वासुदेव प्रजापति हम भारतवासी स्वयं को आर्य कहते थे और मानते थे। आर्य अर्थात संस्कारित, आर्य अर्थात श्रेष्ठ। वह व्यक्ति जो भौतिक स्तर से…
Author: राष्ट्रीय शिक्षा
शरीर आसन की स्थिति निर्दोष रहे!!
✍ दिलीप वसंत बेतकेकर “हमारा राजू लेटे हुए पढ़ाई करता है कितनी बार कहा उसे कि ऐसी स्थिति में पढ़ाई ना करो, परन्तु मानता ही…
बलिदानी शरिश कुमार
✍ गोपाल माहेश्वरी रक्त में भीगी हुई वे लाल माटी पर पड़े थे, उम्र में छोटे सही वे लाल पर्वत से बड़े थे। जिस समय…
डॉक्टर हेडगेवार जी का हिंदुत्व!
✍ प्रशांत पोळ किसी व्यक्ति के कार्य का मूल्यांकन करना है, या उस व्यक्ति ने किये हुए कार्य का यश-अपयश देखना हैं, तो उस व्यक्ति…
हिंदी राम काव्यों में रामराज्य की संकल्पना
✍ डॉ. नाथूराम राठौर भारतीय मनीषा के जिन-जिन ग्रंथों में भगवान राम का चरित्रांकन हुआ है उन सभी में रामराज्य की संकल्पनाएं प्रतिष्ठित हैं। आदि…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 78 (स्वतंत्रता पूर्व राष्ट्रीय शिक्षा के प्रयत्न)
✍ वासुदेव प्रजापति अंग्रेजों ने हमारी देशी शिक्षा व्यवस्था की पूर्ण उपेक्षा करने की नीति अपनाई। उस समय ब्रिटेन के सामने न तो सार्वजनिक शिक्षा…
महादेवी वर्मा का साहित्य दर्शन
✍ डॉ. मंजरी शुक्ला महादेवी वर्मा का जन्म फर्रुखाबाद उत्तर प्रदेश के एक प्रतिष्ठित परिवार में 26 मार्च सन 1960 को सुबह आठ बजे…
आहार-विहार और योग
✍ रवि कुमार आज योग की चर्चा सर्वत्र है। अपने आसपास पार्क में, घर की बालकॉनी में योग करते अनेक व्यक्ति मिल जाएंगे। अंतर्राष्ट्रीय योग…
भगत सिंह का विचार दर्शन
✍ विजय नड्डा इस क्षण भंगुर अस्तित्व में यदि कोई तत्व स्थायी हैं तो वे हैं आत्मसम्मान तथा स्वतंत्रता। ये तत्व बहुत मूल्य चुका कर…