पाती बिटिया के नाम-17 (गद्दार को मृत्युदण्ड)

 – डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया! सिक्के के दो पहलू होते हैं। सत्य के साथ असत्य भी होता है, अच्छाई के साथ बुराई भी होती…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-24 – (दान)

 – वासुदेव प्रजापति   भारतीय शिक्षा की एक प्रमुख विशेषता अर्थ-निरपेक्षता है। आज हमनें पश्चिमी शिक्षा से प्रभावित होकर जीवन में अर्थ को सर्वोपरि मान…

प्रथम महिला शिक्षिका माता सावित्री बाई फुले

-भालचंद्र रावले आधुनिक काल में भारत की प्रथम महिला शिक्षिका माता सावित्री बाई फुले का जीवन अपने लक्ष्य को पूर्ण करने हेतु किये गए संघर्ष…

महामना मदनमोहन मालवीय का दीक्षान्त भाषण – 14 दिसम्बर 1929 (भाग पांच)

 – अवनीश भटनागर स्नातकों को उपदेश स्वाभाविक रूप से दीक्षांत भाषण का उद्देश्य अपनी शिक्षा पूर्ण कर समाज जीवन में प्रवेश करने जा रहे उपाधि…

महामना मदनमोहन मालवीय का दीक्षान्त भाषण – 14 दिसम्बर 1929 (भाग चार)

 – अवनीश भटनागर भाषा के रूप में अंग्रेजी मातृभाषा और राष्ट्रीय विकास में उसकी भूमिका की बात कहने के बाद भी महामना एक भाषा के…

महामना मदनमोहन मालवीय का दीक्षान्त भाषण – 14 दिसम्बर 1929 (भाग तीन)

 – अवनीश भटनागर प्रारम्भिक शिक्षा अति महत्वपूर्ण उच्च शिक्षा संस्थान के दीक्षान्त भाषण में भी मालवीय जी देश में प्रारम्भिक तथा माध्यमिक शिक्षा की गुणवत्ता…

महामना मदनमोहन मालवीय का दीक्षान्त भाषण – 14 दिसम्बर 1929 (भाग दो)

 – अवनीश भटनागर बारह वर्षों की रिपोर्ट श्रद्धेय मालवीय जी का यह दीक्षान्त उद्बोधन 14 दिसम्बर, 1929 को सम्पन्न हुआ था, अर्थात् काशी हिन्दू विश्वविद्यालय…

महामना मदनमोहन मालवीय का दीक्षान्त भाषण – 14 दिसम्बर 1929 (भाग एक)

 – अवनीश भटनागर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने अपना कार्य अक्टूबर, 1917 में प्रारम्भ किया था। विश्वविद्यालय के बारहवें उपाधि-वितरण समारोह (14 दिसम्बर 1929 ई॰) के…

भक्त कवि नरसिंह महेता

 – अनिल रावल ईसा की 15वीं सदी में हुए गुजरात के कवि नरसिंह महेता ‘आदि कवि’ के नाम से जाने जाते है। लोकहृदय में उनका…

भारत ही पुण्य भूमि क्यों?

 – डॉ शिवभूषण त्रिपाठी एक ही परमात्मा-सत्ता सर्वत्र विद्यमान है। अतल, वितल, सुतल, तलातल, रसातल, महातम, पाताल और भू: भुव: स्व:, मह, जन:, तप:, सत्यम्-…