सा विद्या या विमुक्तये
✍ नम्रता दत्त हमने शिशु शिक्षा की यह श्रृंखला 0 (शून्य) से प्रारम्भ की थी और अब इस सोपान से हम 3 वर्ष के…
– नम्रता दत्त शिशु अवस्था (0 से 5 वर्ष तक) संस्कार ग्रहण करने की सर्वश्रेष्ठ अवस्था मानी जाती है, क्योंकि इस अवस्था में शिशु का…
– रवि कुमार भोजन का भी एक संस्कार होता है। आजकल के भाग-दौड़ वाले जीवन में यह संस्कार धूमिल होता दिख रहा है। भोजन क्यों…
– नम्रता दत्त शिशु की स्वाभाविक विशेषताएं एक वर्ष से भी कुछ अधिक समय से हम निरन्तर शिशु शिक्षा का अध्ययन कर रहे हैं। शिशु…
– नम्रता दत्त नवजात शिशु बोल नहीं सकता। लेकिन किसी भी प्रकार का कष्ट अनुभव करने पर वह रोता है। जन्म के समय जब उसकी…
– नम्रता दत्त शिशु का आहार एवं विहार विद्यालय में बच्चों की शारीरिक जांच कराई गई। डॉक्टर्स कक्षाशः अपनी रिपोर्ट देकर चले गए। बच्चों की…
– दिलीप वसंत बेतकेकर गांव का मेला, नाटक अथवा किसी विशेष त्यौहार के अवसर पर बच्चों के हाथ में कुछ पैसे देने के दिन अब…
– रवि कुमार ‘अभिभावक’ शब्द पर विचार करते हैं तो ध्यान में आता है माता-पिता। एक शब्द और चलता है – ‘पाल्य या पालक’ अर्थात्…
– नम्रता दत्त अभी तक शिशु शिक्षा की श्रृंखला में हमने लालयेत् पंचवर्षाणि की चर्चा की। शैशवास्था अर्थात् 0 से 05 वर्ष में शिशु शिक्षा…
– वासुदेव प्रजापति हम संस्कारों को तीन सन्दर्भों में समझ सकते हैं। ये तीन सन्दर्भ हैं —। मनोवैज्ञानिक सन्दर्भ में सामाजिक-सांस्कृतिक सन्दर्भ में पारम्परिक कर्मकांड…