अध्ययन के शत्रु – 1

✍ दिलीप बेतकेकर एक चार बच्चे के माँ-पिताजी मिलने आए। चेहरे पर चिंता थी। कुर्सी पर बैठते ही पिताजी बोले – ‘हमारा अभिमन्यु अध्ययन के…

बंकिम चन्द्र का साहित्य दर्शन

✍ डॉ. कुलदीप मेहंदीरत्ता बंकिम चन्द्र चटर्जी का नाम सुनते या पढ़ते ही प्रत्येक भारतीय को वन्दे मातरम का स्मरण हो आता है, मानो दोनों…

स्व-बोध की सप्तपदी

✍ शिरोमणि दुबे कोई भी राष्ट्र जब अपने स्वबोध के विषय में विस्मृति का शिकार होने लगता है। जब सभ्य समाज अपनी सनातन परंपराओं पर…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 107 (भारतीय शिक्षा की पुनर्प्रतिष्ठा-परिवार में करणीय प्रयास-1)

 ✍ वासुदेव प्रजापति भारत में समाजव्यवस्था की मूल इकाई व्यक्ति नहीं, परिवार है। परिवार एकात्म संकल्पना का सामाजिक रूप है। व्यक्ति परिवार का अंग बनकर…

लोकनायक श्रीराम – ६

✍ प्रशांत पोळ श्रीराम, जानकी और लक्ष्मण रथ में बैठकर वनवास के लिए निकले हैं। मंत्री सुमंत्र, उनके रथ के सारथी है। सारी अयोध्या नगरी…

आरती

✍ गोपाल माहेश्वरी “आरती! जरा गाय को  चारा डाल दे, भूखी होगी।” माँ ने कहा। “अभी डाल देती हूँ माँ!” आरती लगते जेष्ठ को चौदह…

लोकनायक श्रीराम – ५

✍ प्रशांत पोळ अवधपुरी के राजप्रासाद में श्रीराम के युवराज्याभिषेक की तैयारियां चल रही है। मुहूर्त पर चर्चा हो रही है। राजा दशरथ, श्रीराम को…

बच्चन-झगरू-छटू की तिकड़ी

✍ गोपाल माहेश्वरी जिस दिन शंकर का त्रिशूल भी चूक जाए संधानों से। उस दिन रुकने की आशा करना भारत संतानों से।। गीता कहती है…

रामायण सत कोटि अपारा-3 (साहित्य जगत में राम का नाम)

✍ रवि कुमार बाईस जनवरी को अयोध्या जी में रामलला की मूर्ति स्थापना व प्राण प्रतिष्ठा से सम्पूर्ण देश का जो वातावरण राममय हुआ, उसके…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 101 (भारतीय शिक्षा की पुनर्प्रतिष्ठा – भारतीय जीवनदृष्टि एवं शोधदृष्टि)

 ✍ वासुदेव प्रजापति किसी भी देश के वैचारिक क्षेत्र में जब अनवस्था होती है तब उसके सामाजिक जीवन में अव्यवस्थाएँ फैलती हैं। समाज में चिन्तन-मनन…