– डॉ० पवन कुमार वर्तमान समय मानव जीवन के संक्रांति काल का है। संक्रांति से तात्पर्य अन्तः एवं एवं बाह्य जगत के परिवर्तन से है।…
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शिशु शिक्षा 28 – शिशु की मानसिक आवश्यकताएं
– नम्रता दत्त गत सोपान में शिशु की स्वाभाविक विशेषताओं को जाना था कि वह किस प्रकार अन्तःप्रेरणा के द्वारा अपना विकास स्वयं ही करता…
बालक के मन, बुद्धि और शिक्षण पर आहार-विहार का प्रभाव
– रवि कुमार पंजाबी में एक कहावत है- “सवेरे जे चार वजे जग्गे तां देन्न बत्ती घंटे दा हो जान्दा”। अर्थात यदि व्यक्ति प्रातः चार…
अध्ययन क्या है?
– दिलीप वसंत बेतकेकर अभ्यास ‘अभ्यास’, ‘अध्ययन’ अध्ययन। यह अभ्यास- अध्ययन क्या है? इन शब्दों का उच्चारण दिन रात होता है। शिक्षकों द्वारा तैयार उत्तर…
अग्रिम पंक्ति का योद्धा – हरिगोपाल बल
– गोपाल माहेश्वरी संकटों में देख माँ को पुत्र क्यों ना क्रुद्ध हो, क्या अवस्था अर्थ रखती छिड़ चुका जब युद्ध हो। बंगाल में ‘मास्टर…
स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज के संघर्षों की गाथा को पाठ्य पुस्तकों में सम्मिलित करे
– डॉ० अंजनी कुमार सुमन भारत भूमि का कण-कण वीरों के मनोबल और बलिदानियों के रक्त से सिंचित रहा है। समय, काल, परिस्थितियाँ भले ही…
जीवन में अमृत है पानी
– डॉ० सौरभ मालवीय मनुष्य का शरीर पंचभूत से निर्मित है। पंचभूत में पांच तत्त्व आकाश, वायु, अग्नि, जल एवं पृथ्वी सम्मिलित है। सभी प्राणियों…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-59 (सांस्कृतिक अर्थशास्त्र, भाग-2)
– वासुदेव प्रजापति अब तक इस बिन्दु की स्पष्टता हुई होगी कि इकोनोमिक्स के सिद्धांतों पर चलने से सर्वजनहिताय व सर्वजनसुखाय का उद्देश्य सिद्ध नहीं…
शिशु शिक्षा 27 – एक से तीन वर्ष के शिशुओं की माताओं का शिक्षण-1
– नम्रता दत्त शिशु की स्वाभाविक विशेषताएं एक वर्ष से भी कुछ अधिक समय से हम निरन्तर शिशु शिक्षा का अध्ययन कर रहे हैं। शिशु…
एक महान नदी और नारी का मिलन स्थल महेश्वर
– गोपाल महेश्वरी परम पुरातन दिव्य सनातन देवभूमि भारत के मनोहर मध्य क्षेत्र को ही वर्तमान युगीन मध्य प्रदेश कहते हैं। मालवा और नीमाड़…