भारतीय ज्ञान का खजाना – 6 (भारतीय संस्कृति के वैश्विक पदचिन्ह – 1)

–  प्रशांत पोळ गुजरात के सोमनाथ मंदिर के बाण-स्तंभ पर एक श्लोक उकेरा हुआ (लिखा हुआ) है – “आसमुद्रांत दक्षिण ध्रुव पर्यंत अबाधित ज्योतिर्मार्ग…!” [‘इस…

कोविड पश्चात् शिक्षा – विद्यालय व अभिभावकों की भूमिका

 – विजय नड्डा विद्यालय प्रारम्भ होते ही सुनसान पड़े विद्यालय परिसर बच्चों की किलकारियों से फिर से गूंजने लगे हैं। विद्यालय प्रारम्भ होने से बच्चों,…

1857 के स्वातंत्र्य समर में दिल्ली लड़ती है – 1

– रवि कुमार 11 से 16 मई 1857, इन पांच दिनों में दिल्ली में जो हुआ वह इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाना चाहिए।…

ज्ञान की बात 56 (भाषा का सांस्कृतिक स्वरूप – भाग दो)

 – वासुदेव प्रजापति प्रथम भाग में हमने जाना कि भाषा की मूल इकाई अक्षर है और इसकी व्याप्ति सम्पूर्ण जीवन है। अक्षर के विभिन्न पदार्थों…

महान शिक्षाविद व समाज सुधारक महात्मा हंसराज का जीवन-दर्शन

 – डॉ. सुरेन्द्र कुमार बिश्नोई उन्नीसवीं शताब्दी के अंत में जिन महापुरुषों ने देश में शिक्षा व समाज-सुधार के क्षेत्र में महान योगदान दिया उनमें…

पाती बिटिया के नाम-44 (पै चाचा!)

 – डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया! हम सबके सुपरिचित ‘पै चाचा’ यानी श्री अनंत पै का नाम हममें से अधिकांश लोग जानते हैं। यदि मैं…

शिशु शिक्षा 24 (जन्म से एक वर्ष के शिशुओं की माताओं का शिक्षण-4)

  – नम्रता दत्त शिशु के खिलौने एवं वस्त्र 22 जून को आर्यांश एक वर्ष का हो गया था। उसके जन्मदिन के अवसर पर परिवार में…

कोरोना चला स्कूल खुला

 – दिलीप वसंत बेतकेकर अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा था- “जब समस्या आती है तब हम जिस प्रकार विचार करते हैं वैसा ही विचार करके उस…

भारतीय फ़ास्ट-फ़ूड और जंक-फ़ूड

 – रवि कुमार “जैसा खाए अन्न वैसा हो जाए मन” ये कहावत हम सबने सुनी होगी। स्वास्थ्य के साथ-साथ अन्न अर्थात आहार का हमारे मन…

जालियांवाला बाग का नरसंहार

– प्रशांत पोळ कुछ गिने-चुने अंग्रेजों का अपवाद छोड़ दे, तो भारत पर राज करने आया हुआ हर एक अंग्रेज़, सत्ता के नशे में चूर…