सा विद्या या विमुक्तये
– चेतनानन्द सेवा तो हो, पर सेवा करने वाला दिखायी न दे, प्रदर्शन न हो, कर्तृत्त्व अभिमान न हो और परिणाम पाने की रंचमात्र भी…
✍ रवि कुमार रामकथा का आदि स्रोत ‘रामायण’ ही है। राष्ट्रकवि रवींद्रनाथ ठाकुर ‘रामायण’ के भारतीय जन-मानस में व्याप्ति पर लिखते हैं, “रामायण की कथा…
✍ प्रशांत पोळ लक्ष्मण के कहने पर हनुमान जब सुग्रीव को बुलाने जाते हैं, तो राज वैभव के भोग में मग्न सुग्रीव, कुछ दिन रुकने…
✍ प्रशांत पोळ और सीता की दृष्टि, उस अद्भुत हिरण पर पड़ी..! वह मृग सभी अर्थों में विलक्षण था। अत्यंत सुंदर था। अवर्णनीय था। उसे…
✍ प्रशांत पोळ दानवों के निर्दालन तथा लंकाधिपती रावण की टोह लेते हुए श्रीराम, जानकी और लक्ष्मण का दंडकारण्य में प्रवास चल रहा है। ऐसे…
✍ प्रशांत पोळ उड़ती हुई धूल के साथ आती विशाल सेना को देखकर, लक्ष्मण को लगा कि भरत हम पर आक्रमण करने आ रहे हैं।…
✍ प्रशांत पोळ श्रीराम, जानकी और लक्ष्मण रथ में बैठकर वनवास के लिए निकले हैं। मंत्री सुमंत्र, उनके रथ के सारथी है। सारी अयोध्या नगरी…
✍ रवि कुमार बाईस जनवरी को अयोध्या जी में रामलला की मूर्ति स्थापना व प्राण प्रतिष्ठा से सम्पूर्ण देश का जो वातावरण राममय हुआ, उसके…
✍ प्रशांत पोळ मुनीश्रेष्ठ विश्वामित्र के साथ श्रीराम और लक्ष्मण चल रहे हैं। वें गंगा नदी पार कर, दक्षिण तट पर आते हैं। प्रवास पुनः…
✍ रवि कुमार पौष शुक्ल द्वादशी, 22 जनवरी को श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से एक बार पुनः सारा देश राममय हो…