स्वास्थ्य पर वस्त्रों का प्रभाव

✍ रवि कुमार आजकल मनुष्य अपने जूतों व वस्त्रों पर सबसे अधिक खर्च करता है। अच्छा दिखना चाहिए, पर्सनेलिटी बननी चाहिए, इसलिए मनुष्य ऐसा करता…

जीवन में ‘स्व’ का बोध और ‘स्व’ के आधार पर समाज रचना

 – डॉ. कृष्णगोपाल सह सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज में जीवित रहने का मूल आधार ‘स्व’ है। स्व नहीं तो समाज भी नहीं रह सकता।…

भक्ति से समाज बदलने वाले क्रांतिदर्शी पांडुरंग शास्त्री आठवले

✍ डॉ. महेश्वर गं कळलावे पू. पांडुरंग शास्त्री आठवले का जन्म 19 अक्टूबर 1920 को महाराष्ट्र के कोंकण प्रांत के रोहा गाँव में हुआ। उन्हें…

व्यावहारिक वेदान्त  की अमर ज्योति स्वामी रामतीर्थ

– गोपाल माहेश्वरी “जीवन दीप जले ऐसा सब जग को ज्योति मिले, जीवन दीप जले।” संघ में गाए जाने वाले इस गीत के भाव जिनके…

रानी दुर्गावती स्वाधिनता, स्वाभिमान और अस्मिता के लिए हो गई बलिदान

 – निखिलेश महेश्वरी भारतीय संस्कृति और इतिहास आज की युवा तरुणाई को मार्ग दिखाने में सक्षम है। यह प्रकृति, संस्कृति, सभ्यता के साथ ही मानव…

उत्कलमणि गोपबंधु दास

✍ अश्वनी कुमार नायक गोपबंधु दास (1877-1928), जिन्हें उत्कलमणि गोपबंधु दास (उत्कल या ओडिशा का रत्न) के नाम से जाना जाता है, वह एक सामाजिक,…

नई दुर्गा

✍ गोपाल माहेश्वरी नवरात्रि का आरंभ होने वाले थे। द्युति ने निश्चय किया कि वह नौ दिनों का व्रत रखेगी। दिन में केवल एक समय…

वीर बाला कनकलता

✍ गोपाल माहेश्वरी चढ़ता यौवन खिलता बचपन केसरिया कैशौर्य समर्पण। जीवन पाया जिस माटी में उस माटी पर जीवन अर्पण।। विवाह रचाना बड़ों का काम…

दोस्तों से सीखें और सिखाएं

✍ दिलीप वसंत बेतकेकर   हम किससे और कितना सीखते हैं यह संस्कृत के विद्वानों द्वारा सुंदर रीति से प्रस्तुत किया गया है – आचार्यात…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 91 (दायित्व बोध का अभाव)

 ✍ वासुदेव प्रजापति अंग्रेजी राज्य ने अपने हित के लिए हमारे सामाजिक ढ़ाँचे को छिन्न-भिन्न कर दिया। हमारे यहाँ व्यवस्थाओं का विकेंद्रीकरण था, अंग्रेजों ने…