✍ रवि कुमार सम्पूर्ण देश व जगत राममय है। जन-जन के मुख पर राम का नाम है। 22 जनवरी 2024 को श्रीराम जन्मभूमि पर रामलला…
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भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 96 (आशा की किरण कहाँ हैं?)
✍ वासुदेव प्रजापति यूरोप ने पाँच सौ वर्ष पूर्व सम्पूर्ण विश्व का यूरोपीकरण करने का बीड़ा उठाया था। पूरे विश्व में छा जाने हेतु यूरोप…
तुलना, स्पर्धा स्वयं से!!
✍ दिलीप वसंत बेतकेकर एक अत्यंत गरीब आदमी, भरी दोपहरी में, तपती धूप में, बगैर चप्पल पहने, रास्ते से जा रहा था। धूप से पैर…
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में भारतीय भाषाओं की प्रासंगिकता
✍ डॉ. कुलदीप मेहंदीरत्ता एक प्राचीन राष्ट्र के रुप में भारत, विविध भाषाओं का अद्भुत सामाजिक मिश्रण है, जहाँ बड़े लंबे समय से भारत के…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 95 (यूरोपीकरण और साम्यवाद)
✍ वासुदेव प्रजापति आजकल हमारे देश में साम्यवाद शब्द बड़ा प्रचलित है। यह साम्यवाद शब्द भी यूरोपीकरण का ही एक आयाम है। हमारे यहाँ अंग्रेजी…
भारतीय संविधान में वर्णित मौलिक कर्तव्य – भाग दो
✍ डॉ. कुलदीप मेहंदीरत्ता भारतीय संविधान में प्रदत्त मौलिक कर्तव्यों को हम चार वर्गों में विभाजित कर सकते हैं। प्रथम वर्ग है ‘नागरिक उत्तरदायित्व’ इसके…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 94 (भारत में अंग्रेजों के छद्म उद्देश्य)
✍ वासुदेव प्रजापति अंग्रेजों का भारत में आने का मुख्य उद्देश्य तो लूट करना ही था। वे यह लूट दीर्घकाल तक कर सकें इसलिए उसे…
अंदर के दीपक
✍ गोपाल माहेश्वरी वीर ने जैसे ही दीपक जलाए हवा के झोंके ने बुझा दिए। उसने फिर जलाए, फिर ऐसा ही हुआ। तीसरी चौथी बार…
एकाग्रता – ज्ञान की चाभी
✍ दिलीप वसंत बेतकेकर स्वामी विवेकानन्द एक बार एक छोटे से पुल से जा रहे थे, पुल के नीचे बहुते हुए पानी में अंडों के…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 93 (भारत के गुलाम होने के कारण)
✍ वासुदेव प्रजापति भारत के लिए यह एक अप्रत्याशित घटना थी। सन् 1600 ई. में ईस्ट इंडिया कम्पनी भारत में आई। सात समुद्र पार से…