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स्यामा काकी की तीज की कथा – हूँ…

– किसलय पंचोली आज सांगली गांव की पुरखन श्यामा बाई चौधरी को जरा फुर्सत नहीं है। भला हो भी कैसे? वे पूरे गांव में, मतलब…

स्वदेशी एवं वैश्वीकरण के बीच सामंजस्य चाहते थे श्री दत्तोपंत जी ठेंगड़ी

– प्रहलाद सबनानी श्री दत्तोपंत जी ठेंगड़ी का जन्म 10 नवम्बर 1920 को, दीपावली के दिन, महाराष्ट्र के वर्धा जिले के आर्वी नामक ग्राम में…

भारतीय शिक्षा के आध्यात्मिक आधार – भाग पांच (भारतीय दर्शन और शिक्षा)

– ब्रज मोहन रामदेव दर्शन का संबंध जगत मानव और प्रकृति के वास्तविक स्वरूप को समझने से है। यह जगत क्या है? उसका सृष्टि में…

शिक्षकों, पढ़ाना बंद करो

 – दिलीप बेतकेकर पिंकी आधा घंटा तक फोन पर बात करती रही। आधे घंटे पश्चात उसने मोबाइल रख दिया। पिताजी देख रहे थे! “अरे वाह!…

पुस्तक समीक्षा: भारतीय जीवन शैली

– डॉ. महेश कुमार दाधीच “भारतीय जीवन शैली” एक समग्र ग्रंथ है जो भारतीय परंपराओं, स्वास्थ्य विज्ञान, आहार-विहार, और आधुनिक जीवन के बीच संतुलन स्थापित…

भारतीय-ज्ञान-परम्परायाम् बुद्धिः इत्यनया अभिप्रायः

 – चान्दकिरणः व्यवसायात्मिका     बुद्धिरेकेह    कुरुनन्दन। बहुशाखा ह्यानन्ताश्च बुद्धयोऽव्यवसायिनाम्॥ (अर्थात् हे अर्जुन! अस्मिन् लोके कर्मयोगे प्रवृत्तिशीला बुद्धिः एका एव। परन्तु अप्रवृत्तिशीलानाम् अस्थिर-चित्तानां जनानां बुद्ध्यस्तु बहुभेदाः अनन्ताश्च…

शिक्षक साथियों, आओ हम आचार्य बनें

 – दिलीप बेतकेकर मैं अभी-अभी एक विद्यालय में शिक्षक पद पर पदस्थ हुआ था। नया ही था विद्यालय में। मेरे से एक-दो वर्ष पूर्व से…

पंडित दीनदयाल उपाध्याय – व्यक्ति नहीं विचार दर्शन है

 – डॉ. सौरभ मालवीय “भारत में रहने वाला और इसके प्रति ममत्व की भावना रखने वाला मानव समूह एक जन हैं। उनकी जीवन प्रणाली, कला,…

भारतीय शिक्षा के आध्यात्मिक आधार – भाग चार (पुरुषार्थ चतुष्टय की शिक्षा)

– ब्रज मोहन रामदेव भारतीय ज्ञान के क्षेत्र में पुरुषार्थ चतुष्ट्य का विशेष महत्व है। पुरुषार्थ चतुष्टय मानव जीवन के चार सदस्यों को संदर्भित करते…

आज की दुर्गा

– गोपाल माहेश्वरी नगर के अनेक चौराहों पर गरबों की धूम मची थी। रंगबिरंगी तेज जगमगाहट, भक्ति गीतों के पारंपरिक और फिल्मी धुनों वाले गरबा-गीतों…