विश्वहित का अनुसंधान यज्ञ

✍ गोपाल माहेश्वरी उनके सामने मिट्टी की दो मटकियां, एक बड़े से कटोरे जैसे पात्र में बारीक छनी हुई मिट्टी का गाढ़ा घोल और कपड़े…

भारतीय ज्ञान परंपरा

✍ गोपाल माहेश्वरी “गुरुदेव! प्रणाम।” अनिरुद्ध ने बैठक कक्ष में प्रवेश कर सामने बैठे हुए अपने शिक्षक विद्वांस जी के चरण स्पर्श किए। “आओ आओ…

चिंतन और चेतना

✍ गोपाल माहेश्वरी चिंतन और चेतना सगे भाई-बहिन हैं। नाम का प्रभाव उनके विचारों पर भी स्पष्ट दिखाई देता है। पिताजी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के…