– प्रियंवदा मधुकर पांडे स्वामी विवेकानन्द ने भगिनी निवेदिता से कहा था कि “भविष्य की भारत-संतानों के लिए तुम एकाधार में जननी, सेविका और सखी बन…
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महात्मा गांधी और ग्राम स्वराज की अवधारणा
– नवीन कुमार वर्तमान समय में कोरोना वायरस (COVID-19) वैश्विक महामारी, जो पिछले वर्ष चीन के वुहान शहर से उत्पन्न हुई थी, ने सामाजिक, आर्थिक…
गाँधी जी की बुनियादी शिक्षा की वर्तमान में प्रासंगिकता
– डॉ० कुलदीप मेहंदीरत्ता ‘आने वाली नस्लें शायद ही यकीन करे कि हाड़-मांस से बना हुआ कोई ऐसा व्यक्ति भी इस धरती पर चलता-फिरता…
दीनदयाल उपाध्याय की विचार-दृष्टि और दर्शन – 4
– डॉ. अनिल दत्त मिश्र उपाध्याय जी का एकात्म मानव दर्शन आज समय की आवश्यकता है और यह दर्शन न केवल भारत का मार्गदर्शन करने…
दीनदयाल उपाध्याय की विचार-दृष्टि और दर्शन – 3
– डॉ. अनिल दत्त मिश्र भारतीय राज्य का आदर्श धर्मराज्य रहा है। धर्मराज्य से अर्थ कोई मजहबी राज्य नहीं हैं बल्कि यह एक असांप्रदायिक राज्य…
दीनदयाल उपाध्याय की विचार-दृष्टि और दर्शन – 2
– डॉ. अनिल दत्त मिश्र एकात्म मानववाद बंबई (अब मुंबई ) में 22-24 अप्रैल, 1965 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा दिए गये चार विशेष क्रमिक…
दीनदयाल उपाध्याय की विचार-दृष्टि और दर्शन – 1
– डॉ. अनिल दत्त मिश्र एकात्म मानववाद पंडित दीनदयाल उपाध्याय की अद्वितीय, विशिष्ट एवं मौलिक रचना है। कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’, तिलक के ‘गीता रहस्य’ और…
अक्षर पुरुष : बापू वाकणकर – 17 सितम्बर जन्म दिवस विशेष
दुनिया भर में लिपि विशेषज्ञ के नाते प्रसिद्ध श्री लक्ष्मण श्रीधर वाकणकर लोगों में बापू के नाम से जाने जाते थे। उनके पूर्वज बाजीराव पेशवा…
भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों की शिक्षा के प्रवर्तक – गोस्वामी तुलसीदास
– अरुण मिश्र भारतीय संस्कृति विश्व की प्राचीनतम संस्कृतियों में से एक है। अपने उदात्त जीवन मूल्यों और ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ जैसे आदर्शों के चलते समूचा…