काँटों वाला पौधा

✍ गोपाल माहेश्वरी दिन के दस बज रहे थे। उद्यान में सुबह घूमने आने वाले लगभग सभी लोग जा चुके थे। दक्ष का अपने मित्रों…

राष्ट्र चेतना का हुंकार – जनजातीय गौरव दिवस

✍ प्रशांत पोळ आज बड़ा सुखद संयोग बन रहा हैं कि गुरु नानक देव जी की ५५५ वी जयंती, प्रकाश पर्व, के दिन ही, राष्ट्रीय…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 115 (भारतीय शिक्षा की पुनर्प्रतिष्ठा – सामाजिक स्तर पर करणीय प्रयास-3)

✍ वासुदेव प्रजापति सामाजिक स्तर पर सम्बन्धों की आज कोई व्यवस्था नहीं है। हमने वर्ण, जाति व सम्प्रदाय का त्याग कर दिया परन्तु उनके स्थान…

हर असंभव को संभव कर अपने जीवन को साधना बनाने वाले राष्ट्र योगी एकनाथजी

✍ सतीश कुमार सामान्यतः काफी बार हम असाधारण व साधारण व्यक्ति जैसी चीजों के बारे में सुनते व बोलते है। परन्तु हम सभी एक साधारण…

ऋषियों की संतान हैं भारत की समस्त जनजातियाँ

✍ रमेश शर्मा भारतीय वैदिक चिंतन और विज्ञान का अनुसंधान आपस में मेल खाते हैं यदि इन दोनों को आधार बनाकर विचार करें तो हम…

भारतीय पुरावनस्पति वैज्ञानिक बीरबल साहनी – व्यक्तित्व एवं कर्तृत्व

✍ डॉ.सौरभ मालवीय  देश के अनेक वैज्ञानिकों ने विश्व में भारत का नाम ऊंचा किया है। अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त पुरावनस्पति वैज्ञानिक बीरबल साहनी इन्हीं में से…

ऐसे करें अभ्यास-१

✍ दिलीप बेतकेकर सामान्यतः विद्यार्थी अभ्यास करने के लिए दो प्रकार की पद्धति अपनाते हैं- वाचन और पाठांतर! दोनों ही आवश्यक और उपयोगी हैं। वाचन…

अहिल्याबाई होलकर – पुण्यश्लोक से पूर्णकाम देवी तक

 ✍ शिरोमणि दुबे कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जिन्हें हदों-दायरों में समेटना सम्भव नही होता। कुछ ऐसे महामानव होते हैं जिनके जीवन का एक-एक पन्ना,…

रामायण सत कोटि अपारा-5 (संस्कृत साहित्य में रामकथा)

✍ रवि कुमार रामकथा का आदि स्रोत ‘रामायण’ ही है। राष्ट्रकवि रवींद्रनाथ ठाकुर ‘रामायण’ के भारतीय जन-मानस में व्याप्ति पर लिखते हैं, “रामायण की कथा…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 114 (भारतीय शिक्षा की पुनर्प्रतिष्ठा – सामाजिक स्तर पर करणीय प्रयास-2)

 ✍ वासुदेव प्रजापति पश्चिमी सभ्यता को अपनाने के फलस्वरूप भारतीय समाज का मानस भी बदला है। मानस बदलने के कारण परिवार इकाई छोटी होती जा…