– वासुदेव प्रजापति भिक्षा नाम सुनते ही हमारे मन में हेय भाव आता है। क्यों? इसलिए कि भिक्षा मांगने वाला बिना किसी मेहनत के और…
Category: वासुदेव प्रजापति
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-22 (गुरु दक्षिणा)
– वासुदेव प्रजापति भारतीय शिक्षा व्यवस्था आज की शिक्षा व्यवस्था से अनेक बातों में श्रेष्ठ है। भारत में शिक्षा का विचार अर्थ के साथ जोड़कर…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-21 (शिक्षा की अर्थ निरपेक्ष व्यवस्था)
– वासुदेव प्रजापति आज देश के गाँव-गाँव तथा गली-गली में विद्यालय खुलते जा रहे हैं। क्यों? क्योंकि हमने शिक्षा को व्यवसाय बना लिया है।…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-20 (अध्यापन)
– वासुदेव प्रजापति अध्यापन ( पढ़ाना ) अध्ययन अर्थात् पढ़ना और अध्यापन अर्थात् पढ़ाना। पढ़ना और पढ़ाना दोनों एक ही क्रिया के दो पद हैं।…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-19 (अध्ययन)
– वासुदेव प्रजापति अध्ययन (पढ़ना) अध्ययन का अर्थ है, “पढ़ना”। पढ़ना और पढ़ाना या अध्ययन और अध्यापन एक ही क्रिया के दो स्वरूप हैं। हम…
राष्ट्रीय शिक्षा नीति और हमारी ज्ञान विरासत भाग-3
– वासुदेव प्रजापति रसायन शास्त्रज्ञों की भारत में कभी कमी नहीं रही। नागार्जुन, वाग्भट्ट, यशोधर, रामचन्द्र तथा सोमदेव प्रमुख रसायनज्ञ थे। हमारे यहाँ दस रस…
राष्ट्रीय शिक्षा नीति और हमारी ज्ञान विरासत भाग-2
– वासुदेव प्रजापति भारतीय शिक्षा भारतीय समाज की सुव्यवस्था का श्रेय सनातन शिक्षा व्यवस्था को है। डा. ए एस अल्तेकर के अनुसार उपनिषत्काल में भारत…
राष्ट्रीय शिक्षा नीति और हमारी ज्ञान विरासत
– वासुदेव प्रजापति आदिकाल से अखिल विश्व को देती जीवन यही धरा, गौरवशाली परम्परा। सघन ध्यान एकाग्र ज्योति से, किये गहनतम अनुसन्धान। कला शिल्प संगीत…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-18 (आचार्य और छात्र सम्बन्ध)
– वासुदेव प्रजापति आज के समय में सामान्य व्यक्ति भी यह कहता है कि हमारे जमाने में आचार्य-छात्र सम्बन्ध जितने मधुर थे, वैसे आज नहीं…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-17 (आदर्श आचार्य)
– वासुदेव प्रजापति भारतीय समाज में आचार्य का स्थान अत्यन्त आदरणीय, पूजनीय एवं श्रेष्ठ माना गया है। सभी प्रकार के सत्तावान, बलवान और धनवान व्यक्तियों…