– गोपाल माहेश्वरी श्रावण का महीना आरंभ हो चुका था। अच्छी-खासी वर्षा होने से गाँव के रास्ते कठिनाई से ही आने जाने योग्य रह गए…
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21वीं शताब्दी के शिक्षक
– दिलीप बेतकेकर इक्कीसवीं शताब्दी है यह! कैसी है ये नई शताब्दी? इस नई शताब्दी में कौन से परिवर्तन होंगे? क्या समस्याएं होंगी इसमें? भारत…
अंकों की प्रतिस्पर्द्धा नहीं, व्यक्तित्व का समग्र एवं संतुलित विकास हो शिक्षा का लक्ष्य
– प्रणय कुमार गत 13 मई को केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड-परीक्षा के परिणाम घोषित किए गए। 12वीं में 88.39 तो 10वीं में 93.66 प्रतिशत विद्यार्थी…
राष्ट्र चेतना, सांस्कृतिक गौरव एवं हिन्दुत्व चिंतन की प्रधानता है सावरकर जी के लेखन में
– रमेश शर्मा स्वातंत्र्यवीर विनायक सावरकर का पूरा जीवन राष्ट्र चेतना और सांस्कृतिक गौरव की पुनर्प्रतिष्ठा के लिये समर्पित रहा। बालवय से जीवन की अंतिम…
21वीं शताब्दी का भारत
-रवि कुमार 21वीं शताब्दी के भारत की चर्चा केवल भारत ही नहीं तो बल्कि विश्व में सर्वत्र है। 21वीं शताब्दी का भारत कैसा होगा, यदि…
भारतीय ज्ञान का खजाना-31 (सूर्य मंदिरों का रहस्य)
✍ प्रशांत पोळ सूर्य इस शब्द में ही गूढ़ता भरी हुई है। इक्कींसवी सदी का एक चौथाई हिस्सा समाप्त हो रहा है, फिर भी सूर्य…
नागार्जुन के साहित्य में भारतीयता
– डॉ. सुनीता कुमारी गुप्ता कई दिनो तक चूल्हा रोया, चक्की रही उदास। चमक उठी घर भर की आखें, कई दिनों के बाद। मानव के…
रामकृष्ण मिशन
राजेन्द्र सिंह रामकृष्ण मिशन एक भारतीय धार्मिक और सामाजिक संगठन है जिसकी स्थापना स्वामी विवेकानंद ने 1 मई 1897 को बेलूर कोलकाता में की थी।…
पाठ्यक्रम-परिवर्तन की दिशा में ठोस पहल व प्रयास
– प्रणय कुमार किसी भी उदार, जीवंत, गतिशील एवं लोकतांत्रिक समाज में वांछित एवं युगीन परिवर्तन की प्रक्रिया सतत चलती रहती है। जड़ता एवं यथास्थितिवाद…
भारतीय शिक्षा के आध्यात्मिक आधार भाग एक
– ब्रज मोहन रामदेव ‘आध्यात्मिकता’ भारत राष्ट्र की विशेष संकल्पना है। हमारी यह मान्यता है कि सृष्टि रचना के मूल में आत्म तत्व है। यह…