हिंदवी स्वराज्य : एक परिपूर्ण व्यवस्था

–  प्रशांत पोळ जेष्ठ शुक्ल त्रयोदशी, विक्रम संवत १७३१, तदनुसार अंग्रेजी दिनांक ६ जून १६७४, बुधवार को छत्रपति शिवाजी महाराज का, स्वराज्य की राजधानी रायगढ़…

मौलिक मानवी दिमाग

✍ दिलीप बेतकेकर देवाः दण्डमादाय रक्षन्ति पशुपालवत यन्तु रक्षित मिक्षन्ति, बुध्यासभिव जन्तिनाम।। (ईश्वर किसी पशुपालक के समान हाथ में डंडा लेकर किसी की रक्षा नहीं…

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का साहित्य दर्शन

 – डॉ. विजयदत्त शर्मा सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ हिंदी साहित्य के एक ऐसे कवि थे, जिनकी रचनाओं में राष्ट्रीयता, मानवता और भारतीय संस्कृति की गहरी छाप…

“Ekatma Manavdarshan” and the Decolonisation of Bharatiya Mindset

 – Pankaj Jagannath Jayswal Pandit Deendayal Upadhyay is one of those thinkers in Bharat who exercised on ‘Swaraj of ideas’ – means decolonisation of ideas,…

अध्यात्म, राष्ट्रीय एकता और मानवता का महासंगम – महाकुंभ

 – मृत्युंजय दीक्षित सनातन हिंदू संस्कृति का महापर्व है – महाकुंभ, विश्व का सबसे बड़ा आध्यात्मिक, धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव। सनातन संस्कृति की आस्था का…

विश्व के लिए प्रेरक है भारतीय संविधान

 – डॉ. सौरभ मालवीय भारत एक विशाल एवं विभिन्न संस्कृतियों वाला देश है। यहां विभिन्न संप्रदायों, पंथों एवं जातियों आदि के लोग निवास करते हैं।…

पंच परिवर्तन विकसित भारत का मूल आधार

✍ प्रोफेसर रवीन्द्र नाथ तिवारी भारत, अपनी सनातन संस्कृति, सभ्यता, और परंपराओं के कारण से अनादिकाल से विश्व का मार्गदर्शन करता आया है। आज, जब…

वैदिक काल के निर्धारण को वैज्ञानिक दृष्टि से सिद्ध करने वाले लोकमान्य तिलक

✍ डॉ. आशिष मुकुंद पुराणिक लोकमान्य तिलक द्वारा वैदिककाल के निर्धारण पर किए गए शोध में अब पुरातात्विक साक्ष्य मिलने लगे हैं। यूरोपीय और एशियाई…

धर्म, राष्ट्र और राष्ट्रधर्म

  राजकोट (गुजरात) गुरुकुल में ‘धर्म, राष्ट्र और राष्ट्रधर्म’ विषय पर माननीय डॉ० मोहन राव भागवत जी, प.पू. सरसंघचालक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उद्बोधन का…

राष्ट्र चेतना का हुंकार – जनजातीय गौरव दिवस

✍ प्रशांत पोळ आज बड़ा सुखद संयोग बन रहा हैं कि गुरु नानक देव जी की ५५५ वी जयंती, प्रकाश पर्व, के दिन ही, राष्ट्रीय…