– डॉ. विकास दवे मालवी बोली में एक प्रसिद्ध कहावत है जिसका भाव है- “जो व्यक्ति अपनी माँ को माँ नहीं कह सकता वह…
Author: राष्ट्रीय शिक्षा
श्री गुरु नानक देव जी के त्रि-सूत्री सिद्धांत – प्रकाश उत्सव विशेष
– डॉ० नरेंद्र सिंह विर्क भारतीय पंरपरा के अनुसार, जब दुनिया में अन्याय, उत्पीड़न, सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक स्थिति अधोगति में जाने लगे तो उस…
EDUCATIONAL PHILOSOPHY OF GURU NANAK DEV – birth anniversary special
– Kuldeep Mehandiratta In 21st century, human beings are facing unprecedented opportunities and challenges in their lives due to rapid advancement of science and technology.…
कक्षा में शैक्षिक परिणाम-एक अनुभव
– राजेन्द्र बघेल प्रत्येक मनुष्य अपने द्वारा किए गए कार्य का अच्छा परिणाम चाहता है। इसके लिए वह विभिन्न प्रकार के प्रयत्न भी करता है।…
A GOOD TEACHER
– K. Ponraman It is often said, ‘As are the teachers, so is the standard of education’. If competent teachers are available, the likelihood of…
छात्र-छात्राओं के विकास में शारीरिक शिक्षा की भूमिका
– शिव कुमार शर्मा ‘शरीरमाद्य खलु धर्मसाधनम्’ हमारी परम्परा में एक महत्वपूर्ण उक्ति है। धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष रूपी पुरुषार्थ की प्राप्ति का साधन…
बाल केन्द्रित क्रिया आधारित शिक्षा-16 (लेखन कब और कैसे सिखाएं)
– रवि कुमार ‘आपने लेखन कब सीखा’ यह प्रश्न यदि किसी वयस्क से पूछेंगे तो उत्तर आएगा – पहली कक्षा में। और यह पूछेंगे कि…
Types of students, Ethics before education, Curriculum of teaching and Teacher student relationship according to Bharatiya vangmaya (Indian literature)
– Dr KK Aggarwal The Bhagavad Gita (7.16) has described four types of devotees. “catur-vidhabhajante mam janahsukrtino ‘rjuna artojijnasurartharthi jnani ca bharatarsabha” चतुर्विधाभजन्तेमांजना: सुकृतिनोऽर्जुन ।…
मातृभाषा के बिना मौलिक विचारों का सृजन सम्भव नहीं
– देशराज शर्मा जन्म लेने के बाद मानव जो प्रथम भाषा सीखता है उसे उसकी मातृभाषा कहते है। मातृभाषा, किसी भी व्यक्ति की सामाजिक एवं…