लोकनायक श्रीराम – १

✍ प्रशांत पोळ कालचक्र की गति तेज है। वह घूम रहा है। घूमते-घूमते पीछे जा रहा है। बहुत पीछे। इतिहास के पृष्ठ फड़फड़ाते हुए हमें…

जीवन में ‘स्व’ का बोध और ‘स्व’ के आधार पर समाज रचना

 – डॉ. कृष्णगोपाल सह सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज में जीवित रहने का मूल आधार ‘स्व’ है। स्व नहीं तो समाज भी नहीं रह सकता।…

अन्तरिक्ष के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियां

✍ डॉ. कुलदीप मेहंदीरत्ता अंतरिक्ष के क्षेत्र में किसी भी उल्लेखनीय प्रगति को वैश्विक परिदृश्य में अत्यंत सम्मानजनक दृष्टि से देखा जाता है। अंतरिक्ष के…

दीनदयाल उपाध्याय की दृष्टि में भारतीय शिक्षा

 – डॉ. राकेश दुबे दीनदयाल जी की दृष्टि में भारतीय शिक्षा विषय पर विचार करते हुए कुछ प्रश्न स्वभावत: मन में उठते हैं जैसे किसी…

कारगिल युद्ध में भारतीय सेना का कीर्तिमान

 – देवेंद्र सैनी भारत की स्वतंत्रता के समय से ही भारत और पाकिस्तान के संबंध अच्छे नहीं रहे। उसका मुख्य कारण है कश्मीर घाटी. जनसंख्या…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 49 (शिक्षा का सांस्कृतिक स्वरूप)

 – वासुदेव प्रजापति भारतीय शिक्षा को जानने व समझने के लिए ज्ञान की बात नामक पाक्षिक स्तम्भ प्रारम्भ किया गया है। आज से ज्ञान की…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 41 (मनोवैज्ञानिक सन्दर्भ में संस्कार)

 – वासुदेव प्रजापति हम संस्कारों को तीन सन्दर्भों में समझ सकते हैं। ये तीन सन्दर्भ हैं —। मनोवैज्ञानिक सन्दर्भ में सामाजिक-सांस्कृतिक सन्दर्भ में पारम्परिक कर्मकांड…