सा विद्या या विमुक्तये
✍ प्रशांत पोळ और सीता की दृष्टि, उस अद्भुत हिरण पर पड़ी..! वह मृग सभी अर्थों में विलक्षण था। अत्यंत सुंदर था। अवर्णनीय था। उसे…