‘विद्यार्थियों’ के शिक्षकों की आवश्यकता

 – दिलीप बेतकेकर ‘मुझे झटका लगा?’ ‘नहीं।’ ‘मैं संवेदनाहीन हुआ क्या?’ ‘बिलकुल नहीं।’ ‘तो फिर मैं ‘स्थित प्रज्ञ’ हूँ क्या?’ ‘नहीं जी! वह तो बहुत…

हल्दी घाटी युद्ध विजय@450 वर्ष : मेवाड़ के राणा सबके महाराणा

 – डॉ. विवेक भटनागर महाराणा प्रताप एक पराक्रमी योद्धा के साथ कला और स्थापत्य के बड़े प्रेमी भी थे। उन्होंने अनेक मंदिरों, स्मारकों, बावड़ियों और…

दादा जी का चमत्कार       

           – गोपाल माहेश्वरी स्मृति इन दिनों दसवीं बोर्ड की परीक्षा के लिए खूब परिश्रमपूर्वक पढ़ रही थी। उसने ठान लिया…

विश्व-परिसर में योग-संस्कृति के अग्रदूत स्वामी विवेकानन्द

– संतोष कुमार दिवाकर जब सन् 1893 में स्वामी विवेकानंद शिकागो के विश्व धर्म महासभा (World’s Parliament of Religions) में सहस्रों श्रोताओं के समक्ष खड़े…

हल्दीघाटी युद्ध विजय@450 वर्ष : आक्रांता से संधि कैसी

 – प्रताप सिंह झाला ‘तलावदा’ अकबर ने महाराणा प्रताप के पास चार संधि प्रस्ताव भेजे। मान सिंह को तो उन्होंने कहा था कि एक म्लेच्छ…

गर्भ संस्कार : संस्कारित पीढ़ी की नींव

– डॉ शिवानी कटारा भारतीय संस्कृति में जीवन का आरंभ केवल जैविक घटना नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा माना गया है। इसी दृष्टि…

भारतीय शिक्षा के सामाजिक-आर्थिक आधार – भाग एक

डॉ. कुलदीप कुमार मेहंदीरत्ता किसी देश की शिक्षा प्रणाली केवल उसकी बौद्धिक एवं आध्यात्मिक उत्कृष्टता का ही प्रतीक नहीं होती, अपितु वह उस देश की…

केसरिया सांझ

– गोपाल माहेश्वरी श्याम आज विद्यालय से लौटते हुए बहुत ही उदास था। उसका मन ही नहीं हो रहा था कि वह घर लौटे। वह…

शिक्षकों, घर जाओ!

 – दिलीप बेतकेकर शीर्षक पढ़कर नाराज हो गये न आप? हमें ‘घर जाओ’ कहने वाले आप कौन? क्या अधिकार है आपको हमें घर भेजने का?…

भारतीय भाषाओं में चिकित्सा शिक्षा – आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक कदम

 – डॉ. शिवानी कटारा भारत एक बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक राष्ट्र है, जहाँ शिक्षा के क्षेत्र में भाषा का प्रश्न सदैव महत्त्वपूर्ण रहा है। स्वतंत्रता प्राप्ति…