सा विद्या या विमुक्तये
– वासुदेव प्रजापति आज की नई पीढ़ी भारत के स्वतंत्रता संग्राम से अनभिज्ञ है। उसने न जवाहरलाल नेहरु को देखा है न उसे सुभाषचन्द्र बोस…
– गोपाल माहेश्वरी स्वदेशचंद्र जी आज सुबह से ही कुर्ता धोती पहनकर तैयार हो गए तो बेटे शिरीष ने पूछा “बाबूजी! आज कहाँ?” संघ की…
वन्दे मातरम्। सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्, शस्य श्यामलां मातरम्। वन्दे मातरम् ।।1।। शुभ्र-ज्योत्स्ना-पुलकित-यामिनीम्, फुल्ल–कुसुमित-द्रुमदल-शोभिनीम्, सुहासिनीं, सुमधुर-भाषिणीम्, सुखदां, वरदां, मातरम्। वन्दे मातरम् ।।2।। हे माता (भारतमाता)! मैं…