सा विद्या या विमुक्तये
– दिलीप बेतकेकर ‘मुझे झटका लगा?’ ‘नहीं।’ ‘मैं संवेदनाहीन हुआ क्या?’ ‘बिलकुल नहीं।’ ‘तो फिर मैं ‘स्थित प्रज्ञ’ हूँ क्या?’ ‘नहीं जी! वह तो बहुत…
– गोपाल माहेश्वरी स्मृति इन दिनों दसवीं बोर्ड की परीक्षा के लिए खूब परिश्रमपूर्वक पढ़ रही थी। उसने ठान लिया…